चरखी दादरी। चार माह बाद भी कई गांवों में किसानों की एग्री यूनिक आईडी नहीं बनी है। जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई है, वहां रिकार्ड में नाम, पिता का नाम व अन्य विवरण का आधार कार्ड से मिलान नहीं होने से यूनिक आईडी नहीं बन पा रही हैं। सरकार की योजना है कि किसान को सभी प्रकार की सरकारी योजनाओं के लाभ यूनिक आईडी से दिए जाए। इस पर चिंतन किया जा रहा है। ऐसे में किसान परेशान एवं दुविधा में हैं।
== गत जनवरी माह में कृषि विभाग ने किसानों की एग्री यूनिक आईडी बनाने का काम शुरू किया था जो अभी तक पूरा नहीं हो सका है। समीक्षा बैठकों में भी इस समस्या का समाधान नहीं हो रहा है। खरीफ सीजन की फसलों की बिजाई का समय आने वाला है, ऐसे में किसानों को खाद की भी जरूरत पड़ेगी, उस समय भी यूनिक आईडी की जरूरत पड़ेेगी।
== जिन गांवों में चकबंदी नहीं हुई हैं वहां जमीन के रिकार्ड में नाम व पिता के नाम आधार कार्ड के अनुरूप नहीं हैं। किसी किसान के नाम के आगे सिंह नहीं हैं, तो किसी के आगे कुमार नहीं है। ऐसे में आधार कार्ड से जमीन के विवरण का मिलान नहीं हो पा रहा है।
गांव ढाणी फोगाट की कृषि जमीन के ऑनलाइन पोर्टल में अनेक खामियां हैं। इसी प्रकार गांव गुडाना में भी चकबंदी न होने से यूनिक आईडी बनने में दिक्कतें आ रही हैं। किसान आए दिन कार्यालयों के चक्कर काटने को विवश हैं। जिले में 67 हजार में से करीब 45 हजार किसानों की यूनिक आईडी बन चुकी हैं।
यूनिक आईडी के माध्यम से किसान को उसकी जमीन का पूरा विवरण ऑनलाइन देखने को मिलेगा। किसान को किसी प्रकार की दिक्कत नहीं आएगी। आईडी बनने से किसान के हिस्से में मौजूद पूरी जमीन दर्शायी जाएगी। जमीन की रजिस्ट्री बनवाने, खरीद एवं फरोख्त करने में सुगमता हो सकेगी। किसान का अपना अलग हिस्सा दिखाई देगा।
अधिकतर गांवों में किसानों की खतूनी इक्ट्ठी हैं ऐसे में उन परिवारों को काफी दिक्कतें आ रही है। खतूनी इक्ट्ठी होने की वजह से कई बार आपसी विवाद भी होते रहते हैं। सरकार की ओर से जब इस जमीन का अधिग्रहण किया जाता है तो मिलने वाले मुआवजा के बंटवारे की वजह से भी जमीन के हिस्सेदारों में विवाद होते रहे हैं।
इस समय जिले में यूनिक आईडी बनाने का काम गांव स्तर पर जारी है। कृषि, पंचायत व राजस्व विभाग के कर्मचारी गांवों में शिविर में जाकर किसानों की आईडी बना रहे हैं। आईडी बनवाने के लिए आधार कार्ड, मोबाइल नंबर आदि की जरूरत होती है। कई गांवों में जमाबंदी और आधार कार्ड में किसान का नाम एक जैसा नहीं होने की वजह से भी दिक्कत बन रही है। किसानों ने इस समस्या का विकल्प तलाशने की मांग की है।
गांव ढाणी फोगाट में आजादी के बाद से चकबंदी नहीं हुई है। गांव का जमीनी रिकार्ड दुरुस्त नहीं हो सका है ऐसे में गांव के किसानों को अनेक प्रकार की कागजी दिक्कतें आ रही हैं। पोर्टल के जमीनी रिकार्ड व आधार कार्ड में नाम का मिलान नहीं हो पा रहा है।
वर्सन :
= सरकार को किसानों की इन समस्याओं का समाधान करना चाहिए। इसके लिए विकल्प तैयार करना चाहिए ताकि किसानों को कार्यालयों के चक्कर नहीं काटने पड़ें। किसान पहले ही सरकार की नीतियों से परेशान है। किसान को खराब फसल का मुआवजा भी नहीं मिल रहा है।
हरपाल सिंह भांडवा
भाकियू जिलाध्यक्ष।
वर्सन :
= जल्द ही इस संबंध में पंचायत की ओर से जिला कृषि अधिकारी को पत्र लिखा जाएगा। प्रशासन व कृषि विभाग के सहयोग से गांव के सभी किसानों की यूनिक आईडी बनवाई जाएंगी।
सरपंच डिंपल देवी
ग्राम पंचायत, ढाणी फोगाट।
वर्सन :
जल्द किसानों की समस्या को दूर करवाया जाएगा। किसानों को यूनिक आईडी बनवाने में दिक्कत नहीं आने दी जाएगी। जल्द ही इस संबंध में अधिकारियों के साथ बातचीत कर समाधान करवाया जाएगा।
एसडीओ कृष्ण कुमार, कृषि विभाग, दादरी।
वर्सन :
अगर पोर्टल के रिकार्ड में कोई दिक्कत एवं खामियां हैं, तो कृषि विभाग हमें अवगत कराएं, यूनिक आईडी बनने में आ रही दिक्कतों का समाधान कराया जाएगा। पटवारियों के सहयोग से जमीन में दर्ज किसान के विवरण को ठीक करवाया जाएगा।
राजकुमार भौरिया, जिला राजस्व अधिकारी, दादरी।