चरखी दादरी। जिले में पशुपालकों को बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध करवाने की दिशा में कदम बढ़ाया गया है। जिले में करीब 2.88 करोड़ रुपये के बजट से आठ पशु औषधालय बनाए जाएंगे। वहीं, दो गांवों में 80.88 लाख रुपये की लागत से पशु चिकित्सालय बनाए जाने प्रस्तावित हैं।
गांव झींझर और बरसाना में करीब 60.22 लाख रुपये की लागत से पशु औषधालयों का निर्माण पूरा हो चुका है। जिले में पशुधन की संख्या करीब एक लाख 42 हजार है। ऐसे में नए केंद्रों के निर्माण से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को उपचार की सुविधाएं नजदीक मिलने की उम्मीद है।
गौरतलब है कि दादरी कृषि क्षेत्र होने के कारण यहां बड़ी संख्या में किसान खेती के साथ पशुपालन भी करते हैं। पशु उनके लिए दूध उत्पादन और अतिरिक्त आय का महत्वपूर्ण साधन हैं। ऐसे में पशुओं का बीमार होना सीधे तौर पर परिवार की आमदनी को प्रभावित करता है।
लंबे समय से कई गांवों में पशुपालकों को पशुओं के उपचार के लिए दूर स्थित पशु चिकित्सा केंद्रों का रुख करना पड़ता था। इससे समय और पैसे दोनों की बर्बादी होती थी। गंभीर रूप से बीमार या कमजोर पशुओं को वाहन से अस्पताल तक ले जाना भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बनता था।
इलाज के लिए दूरी तय करना बनी परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में पशु चिकित्सा सुविधाएं सीमित होने के कारण कई बार किसानों को पशुओं के उपचार के लिए दूसरे गांव या कस्बे तक जाना पड़ता था। आपात स्थिति में यह समस्या और बढ़ जाती थी। पशु को समय पर चिकित्सकीय सहायता नहीं मिलने से बीमारी बढ़ने का खतरा रहता था। इसके अलावा पशुओं को लेकर आने-जाने में परिवहन का खर्च भी किसानों पर पड़ता था। कई पुराने पशु औषधालय भवनों की स्थिति भी बेहतर नहीं थी। कुछ गांवों में करीब 50 साल पुराने भवनों में सेवाएं संचालित की जा रही थीं।
ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ेंगी सुविधाएं
पैतावास कलां और कारी आदू में पशु चिकित्सालय बनाए जाने हैं। वहीं घिकाड़ा, ऊण, कंहेटी, कलियाण, मांढ़ी केहर और कारीरूपा में पशु औषधालय मंजूर किए गए हैं। प्रत्येक औषधालय के निर्माण पर करीब 30.11 लाख रुपये खर्च होने हैं। झींझर और बरसाना में औषधालयों का निर्माण पूरा हो चुका है। नए केंद्रों से पशुपालकों को स्थानीय स्तर पर पशुओं की जांच, उपचार और स्वास्थ्य संबंधी सलाह मिल सकेगी।
बीमारी से बचाव पर भी जोर
पशुपालकों के लिए केवल बीमार पशु का उपचार ही जरूरी नहीं है बल्कि उन्हें बीमारी से बचाना भी महत्वपूर्ण है। पशुपालन विभाग की ओर से समय-समय पर विभिन्न संक्रामक रोगों से बचाव के लिए टीकाकरण अभियान चलाए जाते हैं। विभाग हर साल मुंहखुर और गलघोटू रोग से बचाव के लिए भी पशुओं का टीकाकरण करता है। गांवों में चिकित्सा केंद्र बढ़ने से ऐसे टीकाकरण अभियानों को भी प्रभावी ढंग से संचालित करने में मदद मिलेगी।
पशु स्वस्थ तो किसान की आय सुरक्षित
किसानों के लिए पशुपालन आय का अहम जरिया है। दूध की बिक्री से होने वाली आमदनी में पशुओं के स्वास्थ्य की महत्वपूर्ण भूमिका रहती है। पशु के बीमार होने पर दूध उत्पादन प्रभावित होने के साथ उपचार पर अतिरिक्त खर्च भी करना पड़ता है। कई बार बीमारी के कारण पशुपालकों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है। नए पशु औषधालय और चिकित्सालय बनने से समय पर उपचार, नियमित स्वास्थ्य जांच, टीकाकरण और रोगों की पहचान की सुविधाएं मजबूत होंगी। इससे किसानों को पशुओं के इलाज के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा और ग्रामीण क्षेत्रों में पशुधन स्वास्थ्य सेवाओं का नेटवर्क भी मजबूत होगा।
जल्द इन गांवों में औषधालय व चिकित्सालय बनाए जाएंगे। बजट मिल चुका है। पशुपालकों को किसी प्रकार की दिक्कतें नहीं आने दी जाएंगी। चिकित्सक समय-समय पर पशुपालकों को रोगों के प्रति जागरूक भी करते हैं।
- डॉ. जसवंत जून, उपनिदेशक, पशु पालन विभाग।