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राजकीय स्कूलों में मिलेगी लाइब्रेरी की सुविधा

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education - फोटो : book
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शिक्षा विभागकी ओर से प्रत्येक मिडिल स्कूल में लाइब्रेरी खोले जाने की प्लान वित्तीय वर्ष की योजना में भेजी गई है। इसी प्लान के तहत जिला शिक्षा कार्यालय ने जिले के 120 हाई और सीनियर सेकेंडरी स्कूलों में भी लाइब्रेरी का इंफ्रास्ट्रक्टचर तैयार करने की मंजूरी के लिए फाइल हेड ऑफिस भेजी है। शिक्षा अधिकार अधिनियम 2009 में स्कूलों में लाइब्रेरी को अनिवार्य माना गया है। लाइब्रेरी को किसी भी स्कूल व कॉलेज में ज्ञान का भंडार एवं रीढ़ माना जाता है। बालक के संपूर्ण व्यक्तित्व का विकास लाइब्रेरी से ही संभव है।
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सरकार की ओर से 2009 में शिक्षा अधिकार अधिनियम बनाया गया था इसे एक अप्रैल 2010 से लागू किया गया था। इस प्रावधान के तहत सभी स्कूलों में बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार का प्रावधान किया गया है। इसके तहत सभी स्कूलों में 35:1 के अनुपात में शिक्षकों का होना जरूरी है। इसी प्रकार स्कूल में लाइबे्ररी, खेल मैदान, सभी विषयों की लैब,पर्याप्त भवन का होना जरूरी है ताकि बच्चों को शिक्षण करने व शिक्षकों को शिक्षण करवाने में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए।
सरकार वैसे भी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए समय- समय पर नई नीति तैयार कर रही है। सेमेस्टर की जगह वार्षिक परीक्षा प्रणाली फिर से लागू की गई है। सक्षम योजना के तहत बच्चों का लर्निंग लेवल सुधार जा रहा है। अंग्रेजी विषय के अलग से अध्यापकों की तैनाती का प्रावधान किया जा रहा है ताकि बच्चे शुरू से ही अंग्रेजी भाषा पर अपनी पकड़ बना सके। इसी प्रकार बच्चों व शिक्षकों के पूरे डाटा को भी ऑनलाइन कर दिया गया है। शिक्षा बोर्ड भी परीक्षा प्रणाली में सुधार करने का प्रयास कर रहा है। जिले के तीनों ब्लॉकों में करीब 360 राजकीय स्कूल हैं जिनमें हाई और सीनियर सेेंकेडरी स्कूलों की संख्या करीब 120 है। फिलहाल स्कूलों में बच्चों व शिक्षकों को लाइब्रेरी की सुविधा नहीं मिल पा रही है।
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दस साल से लाइब्रेरी का इंतजार
गत 10 साल से लाइब्रेरी नहीं खुलने से ज्ञान प्राप्त करने की अनवरत प्रक्रिया कही न कही बाधित हो रही थी। शिक्षा आजीवन एवं सतत सीखने की प्रक्रिया होती है। शिक्षा के दो रूप हैं औपचारिक व अनौपचारिक। औपचारिक शिक्षा तो बच्चा कक्षा- कक्ष मेें सीखता है लेकिन अनौपचारिक शिक्षा लाइबे्ररी में विभिन्न प्रकार की पुस्तकों का अध्ययन करके व समाज के लोगों के संपर्क व अनुभव से सीखता है। लाइबे्ररी से ही महापुरूषों की जीवनी, लेखक, कवि, वैज्ञानिकों, मनावैज्ञानिकों व साहित्यकारों की रचनाएं पढने को उपलब्ध होती हैं। इस प्रकार लाइबे्ररी बालक ही नहीं शिक्षक के व्यक्तित्व निर्माण में भी विशेष भूमिका निभाती है।
स्कूली पाठ्यक्रम तक ही सीमित छात्र
इस समय स्कूलों में लाइब्रेरी भवन नहीं हैं। हर साल पाठयक्रम की जो पुस्तकें सरकार की ओर से भेजी जाती हैं उनको एक कमरे में रखा जाता है तथा एक शिक्षक को इनकी संभाल के लिए जिम्मेदारी सौंप दी जाती है लेकिन इन पुस्तकों में संदर्भ पुस्तकें, महापुरूषों की जीवनी, अध्यात्मिक ज्ञान, सामाजिक ज्ञान विकास, मनोविज्ञान व व्यक्तित्व विकास की पुस्तकें नहीं मिलती हैं बच्चे केवल स्कूली पाठयक्रम तक ही सीमित रह जाते हैं।
दिसंबर माह में मांगी गई थी सर्वे रिपोर्ट
दिसंबर माह में सरकार ने लाइबेरी भवन निर्माण के लिए स्कूलों की सर्वे कर रिपोर्ट मांगी थी। अब जिला शिक्षा कार्यालय की ओर से सर्वे रिपोर्ट तैयार कर सरकार को मंजूरी के लिए भेज दी है। जिला शिक्षा विभाग की ओर से प्रत्येक मिडल स्कूल में भी लाइब्रेरी खोले जाने की सिफारिश एवं प्लान तैयार कर हैड ऑफिस भेजी है। इस रिपोर्ट के साथ जिले के सभी 10 वीं और 12 वीं के राजकीय स्कूलों में लाइब्रेरी भवन निर्माण एवं पूरा इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करवाने के लिए फाइल हेड ऑफिस भेज दी है। जिले में 10 वीं और 12 वीं के कुल स्कूलों की संख्या 120 है।
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स्कूलों में लाइब्रेरी भवन निर्माण के लिए सर्वे रिपोर्ट तैयार कर हैड ऑफिस भेज दी है। सरकार की ओर से एप्रूवल मिलते ही इस प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो जाएगा। प्रत्येक मिडल स्कूल में भी लाइब्रेरी खोले जाने की सिफारिश की गई है।
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जयवीर सिंह, एसडीओ, शिक्षा विभाग
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