चरखी दादरी। पिछले करीब दो दशक से यहां एक संगठित औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की मांग उठ रही है लेकिन सरकार व प्रशासन की अनदेखी के चलते एक तरफ जहां मौजूदा उद्यमियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। वहीं औद्योगिक क्षेत्र न होने से मूलभूत सुविधाओं के अभाव में वायर ड्राइंग उद्योग दम तोड़ रहा है।
करीब साढ़े नौ वर्ष पहले प्रदेश के 22वें जिले के रूप में पहचान पाने वाले दादरी में विकास के तमाम दावों के बावजूद यहां का औद्योगिक भविष्य धुंधला नजर आ रहा है। नए उद्यमियों को उद्योग लगाने में कड़ी मशक्कत करनी पड़ रही है। जबकि सरकार स्वरोजगार के लिए लोगों को प्रेरित कर रही है। हालात इतने बदतर हो गए हैं कि कई उद्यमी तो दूसरे जिलों या प्रदेशों में जाकर उद्योग लगाने को मजबूर हो रहे हैं।
उद्योगों के नियमित संचालन के लिए अधिक लोड की बिजली, पानी और सीवरेज की सुचारु व्यवस्था जरूरी होती है। लेकिन दादरी में औद्योगिक क्षेत्र न होने के कारण उद्योग बिखरे हुए हैं और उन क्षेत्रों में न तो पर्याप्त बिजली मिल पा रही है और न ही सीवरेज व पानी की कोई ठोस व्यवस्था है। लघु उद्योग भारती दादरी इकाई के पदाधिकारियों का कहना है कि नए उद्यमी उद्योग लगाने के लिए तैयार हैं लेकिन जमीन और एनओसी आदि के लिए चक्कर काटकर हिम्मत जवाब दे देती है।
कभी वायर ड्राइंग का हब था दादरी, अब नाममात्र के बचे
दादरी में घट रहे उद्योगों के ग्राफ का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ दशक पहले तक दादरी में वायर ड्राइंग की करीब 25 इकाइयां संचालित थी। इनसे निकलने वाली तार आरसीसी सीमेंट पाइप्स, इलेक्ट्रोड्स, वेल्डिंग रॉड, बाड़ आदि में इस्तेमाल होती है। लघु उद्योग दादरी के सचिव वेदप्रकाश जांगड़ा ने बताया कि अब दादरी में वायर ड्राइंग के उद्योगों की संख्या घटकर 4-5 रह गई है। पहले जहां हर महीने करीब 500 टन तार निकलता था, वहीं अब यह घटकर 50 टन तक सीमित हो गया है।
रिहायशी क्षेत्रों में घुट रहा उद्योगों का दम
गौरतलब है कि दादरी में सीसीआई के सीमेंट कारखाने के अलावा कुछ दशक पहले तक वायर ड्राइंग के दो दर्जन से अधिक उद्योग थे। शहर में रिहायशी क्षेत्र का फैलाव न होने के कारण उस समय ये उद्योग बाहरी क्षेत्र में माने जाते थे। लेकिन अब शहर के चारों तरफ की सड़कों तक रिहायशी कॉलोनियां बन चुकी हैं। ऐसे में ये उद्योग रिहायशी कॉलोनियों से घिर चुके हैं। स्थिति यह है कि उद्योगों के संचालन के दौरान होने वाले शोर और सामान्य उत्सर्जन को लेकर स्थानीय लोग आए दिन शिकायत दर्ज कराते हैं। जिसके कारण उद्यमियों को बार-बार नोटिस व जांच का सामना करना पड़ता है। जिससे उद्योगों के संचालन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।
लघु उद्योग भारती के पदाधिकारी बोले
पिछले करीब 20 वर्षों से लघु उद्योग भारती की ओर से दादरी में औद्योगिक क्षेत्र बनाने की मांग उठाई जा रही है। इसके लिए मुख्यमंत्री को भी पत्र लिखा गया है। वहीं एचएसआईआईडीसी के अधिकारियों को भी अवगत करवाया गया है। औद्योगिक क्षेत्र बनने से क्षेत्र का काफी विकास होगा।
- तिलक जैन, संरक्षक, लघु उद्योग भारती दादरी इकाई।
संगठन की ओर से पिछले लंबे समय से दादरी में औद्योगिक जोन बनाने की मांग की जा रही है। औद्योगिक क्षेत्र बनने से नए उद्योग लगेंगे तो यहां के लोगों को रोजगार मिलेगा। इसके अलावा बाजारों में भी कारोबार बढ़ेगा। सरकार से मांग है कि जल्द से जल्द दादरी में औद्योगिक क्षेत्र की मांग को सिरे चढ़ाया जाए।
-हरिराम खुडानिया, प्रधान, लघु उद्योग भारती दादरी इकाई।
दादरी में औद्योगिक क्षेत्र न होने से नए उद्योग लगाने में काफी परेशानी हो रही हैं। वहीं पुराने उद्योग भी मूलभूत सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ते जा रहे हैं। कई उद्यमी तो ऐसे हैं जो सुविधाओं के अभाव में यहां से पलायन कर चुके हैं। सरकार को आगामी बजट सत्र में दादरी क्षेत्र की इस बड़ी मांग को लेकर घोषणा करनी चाहिए।
- वेदप्रकाश जांगड़ा, सचिव, लघु उद्योग भारती दादरी इकाई।
= लघु उद्योग भारती की ओर से लगातार यह मांग उठाई जा रही है। इसके लिए एमएसएमई विभाग के अधिकारियों को भी अवगत करवाया गया है। अब तो दादरी जिला भी बन चुका है। यहां औद्योगिक सेक्टर बनता है तो काफी उद्योग लगने की संभावना है। यहां से दूसरे प्रदेशों के साथ कनेक्टिविटी भी बेहतर है।
- शिवकुमार बंसल, कोषाध्यक्ष, लघु उद्योग भारती दादरी इकाई।