हरियाणा सिविल मेडिकल एसोसिएशन के आह्वान पर जिले के 17 राजकीय स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात 60 चिकित्सकों ने शनिवार को दो घंटे ओपीडी नहीं देखी। इसके चलते सिविल अस्पताल, मातृ-शिशु अस्पताल, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सेवाएं सुबह 9 से 11 बजे तक प्रभावित रहीं। हालांकि हड़ताल के बावजूद इमरजेंसी केस अटैंड किए गए। वहीं, चिकित्सकों की हड़ताल के चलते जिले में 800 से अधिक मरीजों को परेशानी झेलनी पड़ी।
बता दें कि दादरी शहर में दो सरकारी स्वास्थ्य केंद्र हैं। इनमें सिविल अस्पताल व मातृ-शिशु अस्पताल शामिल हैं। इसके अलावा जिले में तीन सीएचसी (सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र) और 12 पीएचसी (प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र) हैं। इन सभी 17 केंद्रों की दैनिक ओपीडी करीब 2500 रहती है। शनिवार को चिकित्सकों ने सुबह 9 से 11 बजे तक ओपीडी नहीं देखी और हड़ताल पर रहे। चिकित्सकों ने 11 बजे के बाद सीट संभाली और इसके बाद ही मरीजों को उपचार मिल पाया।
वहीं, चिकित्सकों की हड़ताल के चलते करीब 30 फीसदी ओपीडी प्रभावित रही और 800 मरीजों को बिन उपचार के ही लौटना पड़ा। चिकित्सकों ने 11 बजे ओपीडी देखना शुरू किया और उसके बाद कक्ष के बाहर मरीजों की भीड़ लगी रही। उपचार से पहले किसी मरीजों को दो घंटे का लंबा इंतजार करना पड़ा। वहीं, कई मरीज बिन उपचार के ही स्वास्थ्य केंद्रों से लौट गए।
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जिले में चिकित्सकों के 92 पद स्वीकृत
दादरी जिले में चिकित्सकों के 92 पद स्वीकृत हैं जबकि 62 की तैनाती है। एसोसिएशन पदाधिकारियों के अनुसार जिले में सभी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। हड़ताल की समय अवधि में चिकित्सकों ने सिविल अस्पताल के कांफ्रेंस में हॉल में बैठक भी की।
-पर्ची कटी न दवा मिली, दोनों काउंटर रहे बंद
सुबह 9 बजे सिविल अस्पताल समेत सभी अन्य स्वास्थ्य केंद्रों में ओपीडी शुरू होती है, लेकिन चिकित्सकों के हड़ताल पर होने के चलते 11 बजे तक मरीज न पर्ची बनवा पाए और न ही दवा ले पाए। चिकित्सकों के काम पर लौटने के बाद ही ये सेवाएं शुरू हो पाईं।
जानिये...किस स्वास्थ्य केंद्र की कितनी है ओपीडी और कितनी रही प्रभावित
स्वास्थ्य केंद्र- दैनिक ओपीडी, प्रभावित ओपीडी
सिविल अस्पताल-1200- 400
मातृ-शिशु अस्पताल-200-80
सीएचसी- 400-200
पीएचसी-600-120
- ये हैं प्रमुख मांगें
चिकित्सकों के लिए एक विशेषज्ञ कैडर का गठन किया जाए। गतिशील सुनिश्चित कॅरियर प्रगति (एसीपी) योजना लागू हो। एसएमओ की सीधी भर्ती पर तुरंत रोक लगाई जाए। पीजी के लिए बॉन्ड राशि एक करोड़ से 50 लाख किए जाने आदि चिकित्सकों की मुख्य मांगें हैं।
मरीज बोले : सुबह आकर बैठे थे, 11 बजे तक उपचार हुआ न मिली दवा
- एक सप्ताह से बुखार से ग्रस्त हूं। शनिवार सुबह अस्पताल में दवा लेने आई थी। यहां पहुंची तो पता चला कि चिकित्सकों की दो घंटे की हड़ताल है। उन्हें 11 बजे तक इंतजार करना पड़ेगा।
-कमलेश, ढाणी फौगाट
- पत्नी को दवा दिलाने के लिए सिविल अस्पताल आया था। उसे शुगर, बीपी और पैरों में दर्द की शिकायत आया है। साढ़े आठ बजे अस्पताल पहुंचा था और अब तक चिकित्सक सीट पर नहीं बैठे हैं।
-धीर सिंह, झामरी
- मुझे शुगर है। कई दिनों से काफी परेशान हूं। शुक्रवार रात को तकलीफ बढ़ी तो शनिवार सुबह ही अस्पताल पहुंच गया। यहां आने के बाद स्टाफ ने बताया कि 11 बजे तक इंतजार करो।
-विजय, रामलवास
-शनिवार सुबह 9 बजे अस्पताल पहुंच गई थी। सोचा था जल्दी चिकित्सक को दिखाकर समय से घर पहुंच जाऊंगी। एक घंटे से इंतजार कर रही हूं लेकिन अब तक चिकित्सक नहीं पहुंचा है।
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सुमन देवी, रावलधी
एचसीएमएस के आह्वान पर दो घंटे जिले के सभी चिकित्सक हड़ताल पर रहे। इस दौरान इमरजेंसी केस अटैंड किए गए जबकि ओपीडी बंद रखी गई। 11 बजे के बाद सामान्य दिनों की तरह ओपीडी शुरू कर दी गई।
-डॉ. आशीष मान, डिप्टी सीएमओ एवं जिला महासचिव, एचसीएमएसए