चरखी दादरी। इस बार मानसून में कम बारिश होने के कारण रबी फसलों की बिजाई के लिए नहरी पानी की जरूरत बढ़ गई है। इसे देखते हुए सिंचाई विभाग की मांग पर जिले की नहरों में 1000 क्यूसेक पानी छोड़ा गया है। नहरों में यह पानी 17 अक्तूबर तक चलेगा।
इससे किसानों को रबी फसलों की बिजाई के लिए सिंचाई सुविधा मिलेगी। साथ ही शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के करीब 65 जलघरों को भरने से पेयजल व्यवस्था में भी सुधार आने की उम्मीद है। सितंबर माह में बारिश कम होने के कारण इस बार किसानों को खेतों में प्लाव करके रबी फसलों की बिजाई करनी पड़ेगी। ऐसे में सिंचाई के लिए नहरी पानी की मांग अधिक बनी हुई है। इस बार जिले में करीब दो लाख 65 हजार एकड़ क्षेत्र में रबी फसलों की बिजाई के लिए सिंचाई की जानी है।
वर्तमान में खरीफ फसलें पक चुकी हैं। कहीं कटाई चल रही है तो कहीं थ्रैसिंग का काम जारी है। खेत खाली होने के बाद रबी सीजन में किसानों की नकदी फसल मानी जाने वाली सरसों की बिजाई शुरू होगी। इसके लिए पहले खेतों में सिंचाई जरूरी है।
65 जलघरों में भरा जाएगा पानी
नहरों में साफ और स्वच्छ पानी पहुंचने से जलघरों में भी पेयजल की गुणवत्ता में सुधार आने की उम्मीद है। मानसून सीजन के दौरान खेतों से पानी की निकासी कर नहरों में डाले जाने के कारण पानी की गुणवत्ता प्रभावित हुई थी। जिले में करीब 65 जलघर नहरों से भरे जाते हैं। पर्याप्त पानी मिलने से इन जलघरों में पानी भरा जा सकेगा, जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल आपूर्ति बेहतर होने की उम्मीद है।
इस समय बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी और लोहारू कैनाल में पानी छोड़ा गया है। बधवाना नहर में 170 क्यूसेक पानी चल रहा है। इससे करीब 15 जलघर भरे जाते हैं। सांजरवास, ढाणी फोगाट, सांवड़, मिसरी, कपूरी, मंदोला, चरखी, बिरही कलां, घिकाड़ा, पैतावास, अचीना, रानीला, बौंद कलां आदि गांवों के जलघरों में भी पानी भरने की जरूरत है।
भूमिगत जल के दोहन पर भी पड़ेगा असर
कम बारिश के कारण जिले में पेयजल की मांग भी बढ़ी है। सामान्य तौर पर मानसून के दौरान बारिश होने से पेयजल की खपत कम हो जाती है, लेकिन इस बार बारिश की कमी के चलते लोगों को अधिक पानी की जरूरत पड़ रही है। नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने से जलघरों को भरने के साथ सिंचाई के लिए भी किसानों को राहत मिलेगी।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार नहरी पानी की आवश्यकता अधिक है। जिले में पहले से ही भूजल स्तर गिरने की चिंता बनी हुई है। ऐसे में नहरी पानी मिलने से किसानों की ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम हो सकती है और भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन को रोकने में मदद मिलेगी। किसानों ने भी उम्मीद जताई है कि इस बार नहरों में पर्याप्त पानी उपलब्ध रहेगा। हालांकि नहरी पानी की चोरी की आशंका भी बनी हुई है।
सिंचाई विभाग ने किसानों से अपील की है कि वे नहरी पानी की चोरी न करें और खेतों की सिंचाई के लिए नहरों पर लगे सरकारी मोगों का ही इस्तेमाल करें। विभाग के अधिकारी नहरों की साइट पर लगातार निगरानी रखेंगे।
वर्जन
अब किसान रबी की फसलों की बिजाई के लिए सिंचाई करेंगे। ऐसे में नहरी पानी की ज्यादा जरूरत है। नहरों में पानी व बिजली की इस बार ज्यादा जरूरत रहेगी, क्योंकि मानसून की बारिश कम हुई है। सरकार किसान को बिजली व पानी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध करवाए। -हरपाल सिंह भांडवा, अध्यक्ष, भाकियू
वर्जन
जिले को 1000 क्यूसेक पानी मिला है। नहरों में यह पानी 17 अक्तूबर तक चलेगा। जलघरों में पानी पर्याप्त मात्रा में भरा जाएगा। इस बार पानी की गुणवत्ता में भी सुधार आया है। पेयजल की किल्लत नहीं आने दी जाएगी। किसान नहरी पानी की चोरी न करें। -कार्यकारी अभियंता सतेंद्र कुमार, सिंचाई विभाग