केंद्र सरकार की योजना के तहत जिले में पहली बार डिजिटल पशुगणना का कार्य पूरा हो गया है। यह पशुगणना 2017 में पूरी होनी थी। पशुगणना के तहत घर-घर जाकर पशुओं के आंकड़े टैबलेट के जरिये ऑनलाइन अपडेट किए गए हैं। पशुगणना के बाद जिले में आठ साल में पालतू भैंसों की संख्या चार हजार कम हो गई है। वहीं, सूअर की संख्या भी घटी है, जबकि पालतू गायों की संख्या 2324 बढ़ी है।
जिले का राजकीय पशु अस्पताल 1960 में बना था। तब से लेकर अस्पताल उसी रूप में ही चला आ रहा है। अस्पताल में सुविधाओं के विस्तार पर कतई ध्यान नहीं दिया गया है, जबकि आबादी बढ़ने के साथ-साथ पशुओं की संख्या व उनमें खानपान की वजह से बीमारियों का दायरा भी लगातार बढ़ा है।
सभी प्रकार के पशुओं की संख्या के आधार पर ही विभाग प्लानिंग तैयार करता है। सभी सरकारी योजनाएं संख्या के अनुसार ही तैयार की जाती हैं। इस प्लान के तहत पहले पशुओं का पूरा डाटा तैयार करना होता है, ताकि उसी के अनुरूप नए पशु अस्पताल खोले जा सके और दवाओं की उपलब्धता में भी विस्तार हो सके। पशु चिकित्सकों की भर्ती भी पशु संख्या के अनुपात में ही की जाती है, ताकि सभी पशुओं की बीमारियों पर भी साथ-साथ अंकुश लगाया जा सके। गणना के आधार पर दुधारू पशुओं के लिए विशेष बजट निर्धारित किया जा सके।
पशुओं के लिए बजट संख्या के हिसाब से होता है तैयार
आज कल पशुओं में नित नए रोगों को बढ़ावा मिल रहा है, लेकिन पशु उपचार का दायरा न बढ़ने की वजह से पशुपालकों को समय-समय पर काफी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। पशु की हानि से पशुपालक को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। इन पशुओं की गणना के अनुपात में चिकित्सा संबंधी प्लान तैयार किया जाता है। पशुओं के लिए बजट संख्या के हिसाब से ही तैयार किया जाता है।
चार साल देरी से पूरी हुई पशुगणना
इस बार पशुपालन विभाग ने डिजिटल तरीके से पशुगणना करवाई है। पशुगणना 2012 के बाद 15 अक्तूबर 2017 तक पूरी करने का लक्ष्य था, लेकिन गणना का काम काफी देरी से पूरा हुआ है। इसके लिए वीएलडीए व चिकित्सकों की ड्यूटी लगाई गई थी। अलग अलग टीमों ने घर-घर जाकर पशुओं की जानकारी जुटाई और उसी समय लैपटॉप के जरिये डाटा को ऑनलाइन अपडेट किया गया।
87 वीएलडीए ने किया काम पूरा
पशुगणना के लिए 87 वीएलडीए चिकित्सकों को काम सौंपा गया था। यह चिकित्सक पूरी तरह से डिजिटल तकनीक से युक्त से होकर घरों में पहुंचेे। उसी समय डॉटा को अपडेट किया गया। 27 सुपरवाइजर ने मॉनीटरिंग की, ताकि गणना में किसी प्रकार की कोई परेशानी न आए।
गणना में ये पशु किए गए शामिल
गणना के दौरान पालतू गाय, पालतू भैंस, ऊंट, मछली, बकरी, गधा, घोड़ा, खच्चर, कुत्ता व सूअर को शामिल किया गया। पशुगणना के लिए ड्यूटीधारकों को प्री ट्रेनिंग भी दी गई थी। डिजिटल गणना के लिए टैब की मदद ली गई।
यह रही पशुगणना की स्थिति
पशु 2012 2021
पालतू गाय 36087 38412
भैंस 194237 152521
मछली 13740 12946
बकरी 15873 17075
सूअर 2153 1737
वर्जन
पहले चरण की गणना का आंकड़ा जारी कर दिया गया है। नए आंकड़ों के अनुसार सुअर और भैंसों की संख्या घटी है, जबकि पालतू गायों की संख्या में बढ़ोतरी हुई है। पशुगणना डिजिटल तरीके से पूरी की गई है। ऐसा पहली बार हुआ है।
- डॉ. जगत सिंह, पशुगणना सुपरवाइजर