चरखी दादरी। जिले में लंपी रोग फैलने की आशंका के चलते विभाग इस बार पहले से ही सतर्क हो गया है। रोग से बचाव के लिए 4600 वैक्सीन मंगवाई गई हैं। जिले में 4600 गाय हैं। गोशालाओं व लावारिस गायों को भी वैक्सीन लगाई जाएंगी। लंपी रोग में गाय के शरीर पर फोड़े हो जाते हैं।
कई बार मौत तक हो जाती है। पशुपालन विभाग अब रोग के प्रति गलती दोहराना नहीं चाहता। तीन साल पहले जिले में लंपी रोग से कई गायों की मौत हो गई थी। उसके बाद विभाग अब सीजन से पहले ही टीकाकरण कर रहा है। इस रोग में पशु खाना-पीना भी बंद कर देता है। यह रोग एक से दूसरे पशु में भी फैल जाता है।
बचाव के लिए टीकाकरण जरूरी
लंपी रोग से बचाव के लिए समय पर टीकाकरण बेहद जरूरी है। इसके साथ ही पशुपालकों को भी अपने पशुओं की निगरानी करनी चाहिए। यदि किसी गाय के शरीर पर फोड़े दिखाई दें, वह खाना-पीना बंद कर दे या उसकी तबीयत खराब हो, तो उसे अन्य पशुओं से अलग रखना चाहिए और पशु चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इससे रोग के दूसरे पशुओं में फैलने की संभावना कम की जा सकती है।
ये बचाव जरूरी
टीकाकरण के साथ-साथ पशुओं की साफ-सफाई और उनके रहने के स्थान की स्वच्छता पर भी ध्यान देना जरूरी है। गोशालाओं में नियमित सफाई रखने से संक्रमण का खतरा कम किया जा सकता है। विभाग की ओर से पशुपालकों को भी रोग के लक्षणों और बचाव के उपायों के बारे में जागरूक किया जा रहा है।
पशुपालन विभाग हुआ सतर्क
विभाग अब लंपी रोग के प्रति किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं बरतना चाहता। तीन साल पहले हुई पशुओं की मौत के बाद अब सीजन से पहले ही टीकाकरण की व्यवस्था की जा रही है। 4600 गायों को वैक्सीन लगाने के अभियान से जिले में पशुओं को रोग से बचाने की उम्मीद है। इससे पशुपालकों को भी राहत मिलेगी और बीमारी के संभावित प्रकोप को नियंत्रित करने में मदद मिल सकेगी।
जिले में 15 गोशालाएं
जिले में करीब 15 गोशालाएं हैं जिनमें हजारों की संख्या में गाय हैं। गोसेवक एवं समितियां गायों के संरक्षण एवं संवर्धन के लिए काम करती हैं। सरकार की ओर से भी हर वर्ष गोशालाओं के लिए अनुदान राशि जारी की जाती है। यह राशि प्रति गाय के हिसाब से दी जाती है। इसके अलावा गोशाला समितियों की ओर से समय-समय पर चंदा भी एकत्रित किया जाता है। क्षेत्र में शहर व गांव स्तर पर काफी संख्या में गोसेवक भी हैं जो गायों की सेहत व संरक्षण का विशेष ध्यान रखते हैं।
वर्सन:
सभी गायों को लंपी रोग का टीका लगाया जाएगा। इसके लिए टीमें बना रखी हैं। गोशालाओं व लावारिस गायों को टीकाकरण किया जाना है। विभाग गाय संरक्षण के लिए निरंतर प्रयासरत है। गोसेवकों का भी सहयोग मिल रहा है।- डॉ. जसवंत जून, उप निदेशक, पशुपालन विभाग।