खेत के अंदर फसल अवशेष में लगी आग।
चरखी दादरी। उपायुक्त मुनीश शर्मा ने जिला के किसानों से अपील की है कि वे अपनी फसल काटने उपरांत बचे हुए फसल अवशेषों में आग न लगाएं। ऐसा करने के बजाय किसान फसल अवशेष प्रबंधन के लिए चलाई जा रही योजनाओं को अपनाकर व्यवसाय की शुरुआत करें। आगजनी के कारण आमजन के स्वास्थ्य पर दुष्प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण उन्हें स्वास्थ्य संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ता है।
उन्होंने बताया कि सर्वोच्च न्यायालय के दिशा-निर्देशानुसार जिला में कृषि एवं किसान कल्याण विभाग व अन्य विभागों की गांव, खंड व जिला स्तर पर निगरानी कमेटियों का गठन किया गया है, जो कि इस कार्य की बड़ी गंभीरता से लगातार निगरानी कर रही हैं।
उन्होंने बताया कि जिला में रबी 2024-25 फसलों की कटाई का कार्य हो चुका है। बहुत से किसान फसल काटने उपरांत जाने अनजाने में बचे हुए अवशेषों में आग लगा देते हैं। अवशेषों के जलाने की समस्या के सामाधान के लिए सरकार की ओर से योजनाएं चलाई जा रही हैं, जिनको अपनाकर किसान फसल अवशेष प्रबंधन कर सकते हैं और साथ ही अवशेष प्रबंधन को एक व्यवसाय के तौर पर अपना सकते हैं।
नंबरदार और सरपंच किसानों को करें जागरूक
उपायुक्त ने कहा कि जिन गावों में किसान फसल अवशेषों में आगजनी करते पाए गए तो संबंधित गावों के सरंपच व नंबरदार का दायित्व होगा। वे किसानों को समझाएं कि ऐसा करने से उनके विरुद्ध पॉल्यूशन प्रोटेक्शन एक्ट, 1986 व अन्य के तहत कार्रवाई की जाएगी।
यूं वसूल किया जाएगा जुर्माना
दोषी किसान से 2 एकड़ तक आगजनी करने पर 5 हजार रुपये, 2 से 5 एकड़ तक 10 हजार रुपये व 5 एकड़ से अधिक 30 हजार रुपये का जुर्माना वसूल किया जाएगा। ऐसे किसानों की मेरी फसल-मेरा ब्योरा में रेड एंट्री कर दी जाएगी, जिसके फलस्वरूप दोषी किसान अब चल रहे सीजन व अगले दो सीजन तक अपने फसल उत्पाद मंडी में नहीं बेच पाएगा। उप कृषि निदेशक डाॅ. जितेंद्र ने बताया कि विभाग के कर्मचारियों व अधिकारियों की ड्यूटी आगजनी की घटनाओं को रोकने के लिए लगाई जा चुकी है।