चरखी दादरी। वर्ष 2023 खरीफ सीजन के फसल बीमा क्लेम को लेकर लंबे समय से मुआवजे का इंतजार कर रहे किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगी है। किसानों की ओर से लगातार मुआवजे की मांग उठाए जाने के बाद अब बीमा कंपनी ने पुराने फैसले की दोबारा समीक्षा करवाने की प्रक्रिया शुरू की है। कंपनी ने इस संबंध में अपने मुख्यालय को पत्र भेजकर मामले को फिर से देखने की मांग की है। बीमा कंपनी, सरकार और किसान प्रतिनिधियों के बीच पूर्व में हुई वार्ता और निर्णय के आधार पर कंपनी अब पूरे मामले का रिव्यू करवाना चाहती है।
बताया गया है कि 2023 खरीफ सीजन में फसल नुकसान के बाद बड़ी संख्या में किसान बीमा क्लेम की राशि मिलने का इंतजार कर रहे हैं। किसानों की ओर से इस मुद्दे को लेकर समय-समय पर अधिकारियों और सरकार के समक्ष मांग उठाई गई। कई बार आंदोलन और प्रदर्शन भी किए गए। इसके बाद बीमा कंपनी की ओर से अब मामले को मुख्यालय स्तर पर दोबारा देखने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
करीब 15 प्रतिशत किसानों को ही मिला क्लेम
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत 2023 खरीफ सीजन में जिले में फसल नुकसान के मुआवजे के लिए करीब 500 किसानों ने आवेदन किया था। कृषि विभाग के आंकड़ों के अनुसार किसानों की करीब 46 करोड़ रुपये की बीमा राशि बनती है। इसमें से करीब 11 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका है। यानी करीब 15 प्रतिशत किसानों को ही अब तक क्लेम राशि मिल पाई है, जबकि बड़ी संख्या में किसान शेष मुआवजे का इंतजार कर रहे हैं।
ई-क्षतिपूर्ति याेजना को मान रहे बेहतर
किसानों का कहना है कि फसल बीमा योजना के तहत समय पर प्रीमियम जमा करवाने के बावजूद नुकसान होने पर क्लेम हासिल करने में काफी लंबा समय लग रहा है। इससे किसानों में योजना को लेकर नाराजगी बढ़ रही है। कई किसान राज्य सरकार की ई-क्षतिपूर्ति योजना को फसल बीमा योजना की तुलना में बेहतर मान रहे हैं। किसानों के अनुसार ई-क्षतिपूर्ति में फसल नुकसान का आकलन होने के बाद मुआवजा प्रक्रिया अपेक्षाकृत सरल रहती है, जबकि बीमा क्लेम के लिए कई स्तरों की प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
46 करोड़ की राशि में से 11 करोड़ का भुगतान
कृषि विभाग के अनुसार 2023 खरीफ सीजन में जिले के किसानों की करीब 46 करोड़ रुपये की बीमा राशि बनती है। इसमें से करीब 11 करोड़ रुपये का भुगतान किसानों को किया जा चुका है। करीब 35 करोड़ रुपये की राशि का भुगतान अभी बाकी है। किसान लगातार मांग कर रहे हैं कि पात्र किसानों के लंबित क्लेम का जल्द निपटारा किया जाए। अब कंपनी द्वारा मुख्यालय स्तर पर समीक्षा की प्रक्रिया शुरू किए जाने से किसानों को उम्मीद है कि लंबित मामलों पर सकारात्मक निर्णय हो सकता है।
समीक्षा के बाद होगा निर्णय
वार्ता के दौरान किसान प्रतिनिधियों ने भी बीमा कंपनी और सरकार के समक्ष लंबित क्लेम का मुद्दा प्रमुखता से उठाया था। किसानों ने पात्रता के अनुसार जल्द से जल्द मुआवजा जारी करने की मांग की थी। इसके बाद कंपनी ने पुराने निर्णय और समझौते के आधार पर मामले की समीक्षा करवाने की दिशा में कदम बढ़ाया है। हालांकि समीक्षा के बाद क्या निर्णय लिया जाएगा, यह कंपनी के मुख्यालय स्तर पर होने वाली प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
वर्सन:
बीमा कंपनी ने बीमा राशि देना तो दूर अब किसानों को बीमा किस्त ही वापस लौटानी शुरू कर दी है। कई किसानों को बीमा किस्त वापस लौटाई गई है। जिन किसानों को मुआवजा मिला है उन्हें प्रति एकड़ मात्र 700, 900 व 1100 रुपये तक दिया गया है, जो नाकाफी है। कंपनी को बीमा राशि का जल्द भुगतान करना चाहिए। किसानों का बकाया मुआवजा करीब 150 करोड़ है। हरपाल सिंह भांडवा, जिला अध्यक्ष, भाकियू
वर्सन:
बीमा कंपनी ने मुख्यालय से मामले में रिव्यू की मांग की है। इसके लिए कंपनी ने पत्र लिखा है ताकि किसानों,सरकार व बीमा कंपनियों के बीच पहले हुए निर्णय पर फिर से विचार किया जा सके। जिले में किसानों 46 करोड़ की बीमा राशि है जिसमें करीब 11 करोड़ बीमा राशि का किसानों को भुगतान किया जा चुका है। संदीप गोयत, सहायक सांख्यिकी अधिकारी