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नई सीरीज का रजिस्ट्रेशन नंबर लेने के लिए दुपहिया वाहन खरीदता था गिरोह

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गिरोह से बरामद चोरी की लग्जरी गाड़ियां। फाइल फोटो - फोटो : CharkhiDadri
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फर्जी आरसी बनवाकर चोरी की लग्जरी गाड़ियां बेचने वाले गिरोह में शामिल लोग बहुत शातिर हैं। ग्राहकों को गाड़ियां बेचने के लिए वो प्रत्येक हथकंडा अपनाते थे। गिरोह नंबर रिटेशन तकनीक का भी सहारा लेता था। इसके लिए वो एजेंसियों से नए दुपहिया वाहन खरीदते थे और उन वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर चोरी की लग्जरी गाड़ियों की आरसी बनवाते थे। बाद में दुपहिया वाहन पर वीआईपी नंबर होने का झांसा देकर गिरोह बेच देता था। इसका खुलासा एसटीएफ इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने किया है।
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इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि लग्जरी गाड़ी नए मॉडल की होने और उन पर रजिस्ट्रेशन नंबर आठ से दस साल पुराना होने के चलते कई खरीददारों को शक भी होता था। ऐसी स्थिति में ही गिरोह ने नंबर रिटेशन की तकनीक अपनाकर गाड़ियां बेचनी शुरू कर दी। ऐसे गाड़ियों की सूची तैयार की जा रही है जिन्हें दुपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन नंबर पर बेचा गया है।
गौरतलब है कि गिरोह के सात सदस्य पुलिस के हाथ लग चुके हैं। इनमें से पांच को एसटीएफ ने और दो को चंडीगढ़ पुलिस ने दबोचा है। महम निवासी अमित गिरोह का सरगना है जबकि दादरी की प्रेम नगर कॉलोनी निवासी प्रवीन उसका गुर्गा था। महम एसडीएम कार्यालय के एमआरसी अनिल, कंप्यूटर ऑपरेटर कृष्ण व सोमबीर समेत टाइपिस्ट रमेश बामल भी गिरोह के लिए काम करता था। इंस्पेक्टर सतीश देशवाल के मुताबिक ऐसी कई चोरी की लग्जरी गाड़ियां हैं जिन्हें नंबर बदलकर बेचा गया है। ज्यादातर दुपहिया वाहनों के रजिस्ट्रेशन उन्हें महम अथॉरिटी से करवाए हैं।
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क्या है नंबर रिटेशन
इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि दो वाहनों के आपस में रजिस्ट्रेशन नंबर बदलने की प्रक्रिया नंबर रिटेशन कहलाती है। इसकी 700 रुपये फीस तय है। गिरोह पहले दुपहिया वाहनों की आरसी बनवाता था। इसके बाद रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर चोरी की लग्जरी गाड़ियों की आरसी बनवाता था।
गुरुग्राम में भी बेची हैं चोरी की लग्जरी गाड़ियां
एसटीएफ की पूछताछ में खुलासा हुआ कि गिरोह में शामिल आरोपियों ने चोरी की लग्जरी गाड़ियां दादरी, महम, हिसार के अलावा गुरुग्राम में भी बेची हैं। एसटीएफ ने गुरुग्राम से दो गाड़ियां रिकवर कर ली हैं। सूत्रों के अनुसार अभी दादरी, महम और गुरुग्राम से और भी गाड़ियां बरामद होनी हैं।
दलालों का भी पता लगाने में जुटी एसटीएफ
इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि गिरोह में कई लोग शामिल हैं। इनमें से ज्यादातर के नाम सामने आ चुके हैं और उनकी गिरफ्तारी के लिए दबिश दी जा रही हैं। इसके अलावा चोरी की लग्जरी गाड़ियां दलालों के माध्यम से भी बेची जाती थीं और एसटीएफ दलालों का पता लगाने में जुटी हुई है, ताकि बेची गईं चोरी की गाड़ियां बरामद की जा सके।
खुद भी चोरी की गाड़ियां चलाते थे गिरोह में शामिल लोग
एसटीएफ इंस्पेक्टर सतीश देशवाल ने बताया कि गिरोह में शामिल आरोपी चोरी की लग्जरी गाड़ियां बेचने के अलावा खुद भर प्रयोग करते थे। प्रेम नगर निवासी प्रवीन की गिरफ्तारी के समय जो स्कोर्पियो बरामद हुई वो भी चोरी की थी। इसके अलावा महम निवासी गिरोह सरगना अमित भी चोरी की लग्जरी गाड़ियां बरामद करवा चुका है।
गिरोह में शामिल लोग नए दुपहिया वाहन खरीदते थे और चोरी की गाड़ियों में नंबर रिटेशन कराते थे। इसके लिए वो निर्धारित 700 रुपये फीस के रूप में जमा कराते थे। कई खरीददारों को शक होने के चलते उन्होंने नंबर रिटेशन की तकनीक अपनाई, ताकि नई गाड़ी पर नई सीरीज का रजिस्ट्रेशन नंबर होने से आरोपियों को शक न हो।
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- सतीश देशवाल, इंस्पेक्टर, एसटीएफ
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