चरखी दादरी। टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को साकार करने के लिए अब तकनीक और सामुदायिक सहयोग पर जोर दिया जा रहा है। जिले में टीबी मरीजों की शुरुआती पहचान, स्वास्थ्य निगरानी और पोषण संबंधी सहायता को मजबूत करने के लिए स्वास्थ्य कर्मियों को प्रशिक्षित किया गया। स्टेट टीबी डिविजन पंचकूला की टीम ने कफ अगेंस्ट टीबी एप के उपयोग की जानकारी दी।
वीरवार सुबह नागरिक अस्पताल में आयोजित बैठक में जिले के सभी सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) और टीबी विभाग के कर्मचारियों ने भाग लिया। स्टेट टीबी डिविजन से पहुंचीं छवि और प्रिया जायसवाल ने प्रशिक्षण दिया। उन्होंने एप के संचालन और व्यावहारिक उपयोग की प्रक्रिया समझाई।
एप संभावित टीबी मरीजों की शुरुआती पहचान और उनके स्वास्थ्य की निगरानी में मददगार हो सकता है। इसके उपयोग से जरूरतमंद मरीजों तक समय पर पहुंचने और उनकी देखभाल को बेहतर बनाने में सहायता मिलेगी। स्वास्थ्य कर्मियों को बीमारी के शुरुआती लक्षणों के प्रति सतर्क रहने और लोगों में जागरूकता बढ़ाने के लिए भी प्रेरित किया गया।
पोषण और सामुदायिक सहयोग पर जोर
बैठक में निक्षय मित्र पहल को प्रभावी बनाने पर भी चर्चा हुई। स्टेट टीम ने टीबी मरीजों को पोषण संबंधी सहायता और सामुदायिक सहयोग उपलब्ध कराने की आवश्यकता बताई। अधिकारियों ने कहा कि उपचार के दौरान दवाओं के साथ संतुलित पोषण और परिवार व समाज का सहयोग भी महत्वपूर्ण है। इससे मरीजों की देखभाल को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
टीबी नियंत्रण के संकेतकों में सुधार का लक्ष्य
टीम ने टीबी नियंत्रण से जुड़े विभिन्न संकेतकों में सुधार के लिए विभागीय समन्वय पर जोर दिया। बैठक का उद्देश्य जिले में बीमारी की पहचान, मरीजों की निगरानी और सहायता योजनाओं के क्रियान्वयन को मजबूत करना रहा।
नागरिक अस्पताल में जिले के सभी सीएचसी में टीबी रोकथाम के लिए कार्यरत कर्मचारियों और अधिकारियों की संयुक्त बैठक की गई। चिकित्सकों ने लोगों में टीबी के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया। बीमारी के शुरुआती लक्षणों की पहचान के लिए कफ अगेंस्ट टीबी एप का प्रयोग करने की सलाह दी गई। - डॉ. राहुल अरोड़ा, जिला नोडल अधिकारी, टीबी विभाग।