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Charkhi Dadri News: 20 हजार हेक्टेयर घटा कपास का बिजाई रकबा, रिपोर्ट तैयार कर मुख्यालय भेजेगा विभाग

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खेत में खड़ी कपास की फसल।
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चरखी दादरी। जिला में कपास के घटते रकबे को देखते हुए अब कृषि विभाग के विशेषज्ञ इसकी धरातल पर रिपोर्ट तैयार करेंगे। रिपोर्ट समीक्षा के लिए मुख्यालय भी भेजी जाएगी। सर्वे रिपोर्ट तैयार करने का कार्य सोमवार से शुरू होने की संंभावना है। जिले में इस बार मात्र 15 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की बिजाई हो सकी है, जबकि पिछले साल यह आंकड़ा 35 हजार हेक्टेयर क्षेत्र था।
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कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि कपास में रोग ज्यादा लगने से इसकी औसत पैदावार किसान को नहीं मिल पा रही है। इस वजह से किसान कपास की बिजाई से कतराने लगे हैं। दरअसल, कपास को खरीफ सीजन की नकदी फसल माना जाता है। मई माह में कपास की बिजाई होती है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार गर्मी सीजन में लंबे समय तक तापमान 45 डिग्री के आसपास बने रहने से कपास की फसल को ज्यादा नुकसान है। करीब दो हजार हेक्टेयर क्षेत्र में कपास ज्यादा तापमान की वजह से खराब हो गई, जिससे किसानों को मोटा नुकसान झेलना पड़ा है। रेतीले क्षेत्र में तो तापमान की वजह से ज्यादा नुकसान हुआ है। रेतीले क्षेत्र में बार-बार सिंचाई की जरूरत होती है। ऐसे में गर्मी सीजन में उद्योग एवं कृषि क्षेत्र की बिजली में भी कटौती की गई, जिसके चलते टयूबवेल से सिंचाई का कार्य नहीं हो सका।

बार-बार करना पड़ता है कीटनाशक दवा का छिड़काव
किसान हवा सिंह, संदीप, श्यामलाल आदि का कहना है कि कपास में रोग ज्यादा लगते हैं। बार-बार कीटनाशक दवा का छिड़काव करना पड़ता है और निराई-गुड़ाई की जाती है। रोगों की वजह से औसत पैदावार नहीं मिल पाती है, जिससे लागत खर्च भी पूरा नहीं हो पाता है। भारतीय किसान यूनियन के प्रधान हरपाल सिंह भांडवा का कहना है कि सरकार कपास में खराबे का मुआवजा भी नहीं दे रही है। पिछले सालों का मुआवजा ही बकाया है। यही वजह है कि किसानों का कपास की खेती से रुझान कम होने लगा है।
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जल्द ही कपास फसल की धरातल पर रिपोर्ट तैयार की जाएगी। इसके लिए सर्वे किया जाएगा। कपास का रकबा घटना चिंता का विषय है। सर्वे रिपोर्ट तैयार कर उच्चाधिकारियों को भेजी जाएगी।
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- डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी
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