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सेवा का जज्बा: कोई घर से 850 किमी. दूर तो कोई बीमार मां को छोड़कर कर रहा मरीजों का उपचार

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पीजीआई रोहतक से प्रतिनियुक्ति पर जिला में आए चिकित्सक और प्रशिक्षु छात्र इन दिनों दादरी में मरीजों के उपचार में दिन-रात लगे है। कोरोना के मरीजों के उपचार में ये लोग अहम भूमिका निभा रहे हैं। कोई पिछले 10 दिन से तो कोई एक सप्ताह से लगातार अपनी सेवाएं दे रहा है। अहम बात ये है कि इन चिकित्सकों के परिचित या परिजन बीमार हैं और इसके बावजूद ये कार्यस्थली पर डटकर अपना फर्ज बखूबी निभा रहे हैं। दादरी अस्पताल और कोविड अस्पताल में मूलरूप से मध्य-प्रदेश निवासी एवं न्यूरोलॉजी में डीएनबी कर रहे डॉक्टर बीरभान अपने घर से करीब 850 किलोमीटर दूर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। वहीं, महेंद्रगढ़ निवासी डॉ. प्रियंका अपनी बीमार मां को छोड़कर सिविल अस्पताल में वेंटिलेटर ऑपरेट कर रही हैं। अमर उजाला से बातचीत में प्रतिनियुक्ति पर आए इन चिकित्सकों ने ब्लैक फंगस के प्रारंभिक लक्षणों और अब तक के अनुभव को भी सांझा किया।
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सभी मरीजों का जांच कर डॉ. बीरभान देते हैं इलाज की सलाह : पीजीआई रोहतक से न्यूरोलॉजी में डीएनबी कर रहे मध्यप्रदेश के शहडोल जिला निवासी डॉक्टर बीरभान सिंह के अनुसार वे जिला में कोरोना के मरीज के उपचार के लिए नागरिक अस्पताल सहित एमएलआर अस्पताल में प्रतिदिन राउंड लेकर वहां दाखिल सभी मरीजों का जांच करते हैं और उपचार के लिए अपनी सलाह देते हैं। साथ ही अस्पताल से इमरजेंसी में कोई फोन आता है तो तुरंत वहां पहुंचकर मरीज की सहायता की जाती है। डॉ. बीरभान ने कहा कि इस समय बीमार लोगों की सेवा ही उनका कर्तव्य है और वे 24 घंटे मरीजों के लिए उपलब्ध हैं। डॉ. बीरभान अपनी पत्नी और दो बच्चों को रोहतक में घर पर छोड़कर दादरी के लोगों की सेवा कर रहे हैं।
मरीज के इलाज के प्रबंधन पर नजर रख रहे डॉ. नीरज : हिसार के भाटौल जाट्टान गांव निवासी पीजीआई रोहतक से न्यूरोलॉजी में डीएनबी कर रहे डॉक्टर नीरज भी दादरी के लोगों की सुरक्षा के लिए 24 घंटे अपनी सेवाएं दे रहे हैं। डॉ. नीरज के अनुसार वे मरीज के इलाज के प्रबंधन का कार्य देखते हैं और मरीज को कौन सा ट्रीटमेंट किस समय देना है इसको लेकर अपनी सलाह देते हैं। कोशिश रहती है कि किसी भी मरीज को चिकित्सीय तौर पर कोई परेशानी न हो। डॉक्टर नीरज के जानने वाले कई लोग भी कोरोना की चपेट में आ चुके हैं। बावजूद इसके डॉक्टर नीरज लगातार लोगों की सुरक्षा और मरीजों के उपचार के लिए लगे हुए हैं।
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वेंटिलेटर का सुचारु संचालन संभाल रहीं डॉ. प्रियंका : महेंद्रगढ़ निवासी पीजीआई रोहतक से एनेस्थीसिया कर रही डॉ. प्रियंका अग्रवाल दादरी में उपलब्ध वेंटिलेटर को देख रही हैं और उनके सुचारू संचालन को सुनिश्चित कर रही हैं। डॉ. प्रियंका के अनुसार कोरोना से ग्रसित वेंटिलेटर पर उपचार ले रहे मरीजों की देखभाल बेहद जरूरी है। इसके लिए वेंटिलेटर का सही व सुचारू रूप से चलना अनिवार्य है। ऐसे में उनका काम मरीज के उपचार के लिए प्राथमिक आवश्यकता की तरह है। वे अस्पताल में भर्ती मरीजों के उपचार के लिए 24 घंटे उपलब्ध है। डॉक्टर प्रियंका की माता स्वयं बीमार हैं। इसके बावजूद वे दादरी में मरीजों की देखरेख में लगी हुई हैं।
ये प्रशिक्षु छात्र कर रहे मरीजों के इलाज में सहयोग : पीजीआई रोहतक से दादरी में पहुंचे प्रशिक्षु छात्रों में से सिरसा के औड़ा गांव निवासी पूजा गर्ग, फतेहाबाद के भूना गांव निवासी पारुल भुक्कल और रेवाड़ी निवासी पारुल गुप्ता भी उन्हें दिए गए कार्य को बखूबी निभा रही। ये सभी एमएलआर अस्पताल में मरीजों की देखभाल और शहर में होम आइसोलेशन में उपचार ले रहे मरीजों की स्क्रीनिंग का कार्य कर रही है। ये छात्र एमएलआर अस्पताल में लगभग छह घंटे तक पीपी किट पहनकर मरीजों का बीपी और ऑक्सीजन लेवल आदि जांचने का काम करते हैं। साथ ही कोरोना के कारण दुर्भाग्यवश मर चुके लोगों की डेथ ऑडिट का कार्य भी कर रही हैं। छात्र होम आइसोलेशन में घर-घर जाकर लोगों का सैंपल ले रहे हैं और लक्षण वाले लोगों की रिपोर्ट तैयार करके स्वास्थ्य विभाग को भी सौंप रहे है।
ब्लैक फंगस का सही समय पर इलाज जरूरी : पीजीआई रोहतक से प्रतिनियुक्ति पर दादरी के मरीजों का उपचार कर रहे डॉ. बीरभान और डॉ. नीरज के मुताबिक ब्लैक फंगस का समय पर इलाज बेहद जरूरी है। देरी पर जान तक का खतरा हो सकता है। चिकित्सकों ने कहा कि पहले से किसी गंभीर बीमारी से ग्रसित लोगों में इस बीमारी का ज्यादा खतरा रहता है। आंख का लाल हो जाना, आंख के चारों तरफ लाली रहना, आंख से पानी आना और आंख के चारों तरफ दर्द रहना आदि ब्लैक फंगस के प्रारंभिक लक्षण है।
पीजीआई से आए डॉक्टर और छात्र निभा रहे अहम भूमिका : कुछ दिनों पहले तक जिला में वेंटिलेटर को चलाने के लिए फिजिशियन और एनस्थेटिक नहीं थे। न ही पर्याप्त संख्या में स्वास्थ्य कर्मी जिला में थे। जिला के लोगों की सुरक्षा के लिए सरकार से इस बारे में अनुरोध किया गया और अब जिला में प्रतिनियुक्ति पर तीन चिकित्सक, पांच प्रशिक्षु छात्र और 16 एमबीबीएस फाइनल वर्ष के छात्र मरीजों के इलाज में अपना सहयोग दे रहे हैं। -राजेश जोगपाल, उपायुक्त।
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