चरखी दादरी। जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग ने घरेलू बिजली उपभोक्ता को लगातार गलत बिल भेजने के मामले में दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम को कड़ी फटकार लगाई है। आयोग के अध्यक्ष मंजीत सिंह नरयाल की पीठ ने निगम की कार्यप्रणाली को लापरवाह और उपभोक्ता अधिकारों की अवहेलना करने वाला माना है। बिजली उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम का आदेश नहीं मानने पर बिजली निगम पर 50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है जिसे राज्य आयोग के विधिक सहायता खाते में जमा कराने के आदेश दिए गए हैं। फोरम ने यह भी स्पष्ट किया है कि निगम चाहे तो इस जुर्माने की राशि को संबंधित अधिकारियों से वसूल सकता है। इसके साथ ही उपभोक्ता के गलत बिल को ठीक करने और मानसिक उत्पीड़न के तौर पर 25 हजार व कानूनी खर्च के रूप में 10 हजार रुपये का मुआवजा देने के निर्देश दिए।
दादरी निवासी पंकज कुमार ने आयोग में शिकायत दर्ज कराई थी कि उनके परिसर में अजय कुमार के नाम से घरेलू बिजली कनेक्शन है। वर्ष 2020 से ही उनका बिजली मीटर खराब था जिसके कारण उन्हें लगातार गलत बिल भेजे जा रहे थे। निगम की अपनी ही प्रयोगशाला ने जांच में माना था कि मीटर बिना लोड के भी चल रहा था। इसके बाद भी निगम ने 55,111 रुपये की कटौती का प्रस्ताव तो तैयार किया परंतु उच्च अधिकारियों की मंजूरी न मिलने की बात कहते हुए उपभोक्ता को इसका लाभ नहीं दिया गया। परेशान उपभोक्ता ने बिजली उपभोक्ता शिकायत निवारण फोरम (सीजीआरएफ) गुरुग्राम का दरवाजा भी खटखटाया। फोरम ने मार्च 2023 में निगम को बिल सुधारने के निर्देश दिए थे। निगम ने इस आदेश का पालन करने के स्थान पर उपभोक्ता को दिसंबर 2023 में 3,07,683 रुपये का एक और भारी-भरकम बिल थमा दिया। इसके बाद उपभोक्ता को जिला उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग में शिकायत दर्ज करानी पड़ी। उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बिजली निगम का रवैया पूरी तरह से सेवा में कोताही और अनुचित व्यापार व्यवहार का उदाहरण है। आयोग ने आदेश दिया कि निगम 20 दिसंबर 2023 के विवादित बिल को वापस ले या संशोधित करे और उपभोक्ता को 55,111 रुपये का लाभ देकर वास्तविक खपत के आधार पर नया बिल जारी करे। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि बिजली निगम चाहे तो इस जुर्माने और मुआवजे की राशि की वसूली उन दोषी अधिकारियों या कर्मचारियों से जांच कराकर कर सकता है, जो इस लापरवाही के जिम्मेदार रहे हैं। आदेशों का पालन 45 दिनों के भीतर करना होगा। ऐसा न करने पर देय राशि पर नौ प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।