संवाद न्यूज एजेंसी
बौंदकलां। कृषि विभाग की ओर से रविवार को मिसरी गांव में किसान जागरूकता शिविर लगाया गया। इसमें किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दी गई। इसके अलावा धान की पराली जलाने से होने वाले नुकसान के साथ पराली प्रबंधन के तरीके भी बताए गए।
कृषि विभाग के अधिकारियों ने बताया कि धान की पराली में आग लगने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति कम हो जाती है। मिट्टी में हानिकारक रसायन जमा हो जाते हैं, जो पैदावार कम होने का कारण बनते हैं। इसके अलावा, वातावरण भी दूषित होता है। इससे हानिकारक गैसें व धूल के कण वायुमंडल में जमा हो जाते हैं। इससे सांस लेने में तकलीफ, एलर्जी, अस्थमा व कैंसर जैसी गंभीर बीमारियां होने की आशंका होती है।
उन्होंने खेत में ही पराली प्रबंधन के लिए प्रयोग होने वाले कृषि यंत्रों जैसे सुपर सीडर, जीरो ड्रिल, रीपर वाइडर आदि के प्रयोग से पराली प्रबंधन करने के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने इन कृषि यंत्रों पर किसानों को मिलने वाली सब्सिडी की जानकारी दी।
डॉ. कृष्ण कुमार ने सरकार की तरफ से दी जाने वाली सुविधाओं की विस्तार से जानकारी दी। डॉ. मनीष कुमार ने आगामी मौसम में होने वाली फसल की बिजाई, खाद, बीज, कीट, बीमारियों की रोकथाम के लिए जानकारी दी। साथ ही खाद व कीटनाशकों के अंधाधुंध प्रयोग से होने वाले नुकसान के बारे में बताया।
ा