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Charkhi Dadri News: सिविल सर्जन-चिकित्सक विवाद ने पकड़ा तूल, महानिदेशक से जांच व तबादले की मांग

Wed, 20 May 2026 01:28 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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दादरी जिला मुख्यालय पर स्थित नागरिक अस्पताल। 
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संवाद न्यूज एजेंसी
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चरखी दादरी। दादरी के सिविल सर्जन व नागरिक अस्पताल में तैनात एक चिकित्सक के बीच करीब एक सप्ताह पहले हुआ विवाद अब तूल पकड़ता जा रहा है।
हरियाणा सिविल मेडिकल सर्विस (एचसीएमएस) एसोसिएशन दादरी इकाई के पदाधिकारियों ने विभाग के महानिदेशक को पत्र लिखते हुए जिले के स्वास्थ्य विभाग में भय और उत्पीड़न का माहौल बनाने सहित कई आरोप लगाते हुए तत्काल प्रशासनिक हस्तक्षेप एवं निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि पांच दिनों में संतोषजनक कार्रवाई न होने पर 25 मई से चिकित्सक हड़ताल पर चले जाएंगे। वहीं सिविल सर्जन डॉ. नरेश कुमार ने सभी आरोपों को पूरी तरह बेबुनियाद बताया है।
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यह था मामला

नागरिक अस्पताल में तैनात चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनील कुमार ने एसोसिएशन को बताया कि सीएमओ डॉ. नरेश कुमार ने उन्हें 13 मई को दोपहर करीब एक बजे अपने कक्ष में बुलाया और एक गलत कार्य के लिए उन पर दबाव बनाया। मना करने पर उनके साथ गाली-गलौज की और सिक्योरिटी गार्ड को बुलाकर धक्के मारकर बाहर करने को कहा। जब उन्होंने बाहर जाने से मना किया तो गिरफ्तार करवाने की धमकी दी तथा स्टाफ के सामने बेइज्जत किया और सामान उठाकर मारने का प्रयास किया गया। इसके अलावा उसी शाम को सीएमओ ने पत्र जारी करते हुए उन्हीं से स्पष्टीकरण भी मांग लिया, जिसका जवाब उन्होंने उच्च अधिकारियों को दे दिया।



चार्जशीट के लिए पत्र लिखने पर और बढ़ा विवाद

एसोसिएशन पदाधिकारियों ने बताया कि सिविल सर्जन ने इस मामले में बगैर किसी जांच-पड़ताल के एक जूनियर चिकित्सक को बोर्ड में शामिल करते हुए डॉ. सुनील कुमार को चार्जशीट करने के लिए सोमवार को विभाग के महानिदेशक को पत्र भेज दिया। इसके विरोध में एसोसिएशन ने सोमवार को ही विभाग के महानिदेशक को ज्ञापन प्रेषित किया। जिसमें बताया गया कि सिविल सर्जन का रवैया चिकित्सकों व स्टाफ के साथ तानाशाही, अपमानजनक और डराने-धमकाने वाला रहा है। कहा कि उन्हें आधिकारिक बैठकों के दौरान मानसिक रूप से प्रताड़ित किया जाता है और उनके खिलाफ झूठी शिकायतें दर्ज कराने तथा जबरन प्रतिनियुक्ति पर भेजने की धमकियां दी जाती हैं। चिकित्सा प्रमाण पत्रों और मेडिको-लीगल दस्तावेजों में अनुचित प्रशासनिक हस्तक्षेप किया जाता है। विभाग में बाहरी और अनधिकृत व्यक्तियों का दखल भी बढ़ गया है। एसोसिएशन ने कहा कि इसी कारण जिले के कई चिकित्सक पहले ही इस्तीफा दे चुके हैं या स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति ले चुके हैं।



एसोसिएशन ने ये रखी मांगें

ज्ञापन के माध्यम से एसोसिएशन ने मामले की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए मौजूदा सिविल सर्जन का तबादला करने और जिले से बाहर के वरिष्ठ अधिकारियों की एक स्वतंत्र जांच समिति गठित करने, 13 मई की घटना के सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने, बाहरी हस्तक्षेप पर तुरंत रोक लगाने की मांग की है। एसोसिएशन ने ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्वास्थ्य) और उपायुक्त दादरी को भी भेजी हैं।



एसोसिएशन के ज्ञापन भेजने पर चार्ज वापस लेने, प्रतिनियुक्ति करने के आरोप

पदाधिकारियों ने बताया कि एसोसिएशन की ओर से उच्च अधिकारियों को ज्ञापन भेजने के बाद सिविल सर्जन ने मंगलवार को जिले में तैनात तीन डिप्टी सिविल सर्जन से चार्ज वापस ले लिए। वहीं एमसीएच यूनिट में तैनात एक महिला चिकित्सक की सप्ताह में तीन दिन बौंद सीएचसी में ड्यूटी लगाने के आदेश जारी किए। इनके अलावा एक चिकित्सक की स्टाफ नर्स पत्नी की भी दूसरे स्टेशन पर प्रतिनियुक्ति कर दी। इन सबसे एसोसिएशन में भारी रोष का माहौल बना हुआ है।
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पहले दिन से ही मैं जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार के लिए कार्य कर रहा हूं और इसके तहत सभी को काम करना पड़ रहा है। कुछ चिकित्सकों को यह बात हजम नहीं हो रही और डाॅ. सुनील मामले की आड़ में वो अपना स्वार्थ सिद्ध कर रहे हैं। मेरे ऊपर लगाए गए सभी आरोप बेबुनियाद हैं और इस मामले की निष्पक्ष जांच के लिए भी तैयार हूं। किसी स्टाफ सदस्य से मैंने दुर्व्यवहार नहीं किया है। डाॅ. सुनील ने उच्चाधिकारी का आदेश मानने से मना किया जबकि मेरे कार्यालय में मेरे सामने ही स्टाफ से बदसलूकी भी की। यहां तक की हाथ तोड़ने की धमकी तक दी गई।

-डाॅ. नरेश कुमार, सिविल सर्जन, दादरी।
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