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Charkhi Dadri News: 13 माह बाद ऑनलाइन हुई शहर की नई जमाबंदी, अब प्लॉट और मकानों की रजिस्ट्री का रास्ता साफ

Fri, 14 Aug 2026 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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तहसील कार्यालय दादरी। 
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चरखी दादरी। करीब 13 माह के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार दादरी शहर की नई जमाबंदी ऑनलाइन कर दी गई है। इसके साथ ही शहर में प्लॉट और मकानों की रजिस्ट्री पर लगी रोक भी समाप्त हो गई है।
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अब तक केवल खून के रिश्ते में ही रजिस्ट्री हो रही थी लेकिन नई जमाबंदी ऑनलाइन होने के बाद सामान्य खरीद-फरोख्त का रास्ता भी खुल गया है। नई जमाबंदी में करीब चार हजार नए इंतकाल दर्ज किए गए हैं जबकि शहर में लगभग 5600 खेवट धारक हैं। जून 2025 में शुरू हुआ यह कार्य विभिन्न कारणों से लंबा खिंच गया था जिससे लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

जमीन की खरीद के अटके थे काम
नई जमाबंदी तैयार न होने से पिछले एक वर्ष से अधिक समय से जमीन और मकानों की खरीद-फरोख्त प्रभावित थी। रजिस्ट्री, नाम परिवर्तन, दाखिल-खारिज और अन्य राजस्व संबंधी कार्य अटके हुए थे।
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लोगों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए पटवारी और तहसील कार्यालय के लगातार चक्कर लगाने पड़ रहे थे। अब ऑनलाइन रिकॉर्ड अपडेट होने के बाद इन कार्यों में तेजी आने की उम्मीद है।

2025 में शुरू हुआ था काम
जमाबंदी तैयार करने का कार्य जून 2025 में शुरू हुआ था लेकिन उसी दौरान जिले में जलभराव की स्थिति बनने से पटवारियों की ड्यूटी फसल नुकसान के सत्यापन में लगा दी गई। इसके कारण करीब डेढ़ महीने तक यह कार्य बाधित रहा।
राजस्व विभाग ने 15 जून 2025 से पूरे शहर का भूमि रिकॉर्ड ऑफलाइन कर दिया था ताकि नए रिकॉर्ड को त्रुटिरहित तैयार किया जा सके। इस दौरान कोई भी व्यक्ति जमीन का नामांतरण, इंतकाल या अन्य राजस्व संबंधी कार्य नहीं करा सका।


2019 से चली आ रही थी रिकॉर्ड में हजारों त्रुटियां
वर्ष 2019 में जमीन का रिकॉर्ड ऑनलाइन करते समय पुराने ऑफलाइन रिकॉर्ड को ही अपलोड कर दिया गया था। इसके बाद हुए बदलाव समय पर अपडेट नहीं किए गए जिससे हजारों त्रुटियां रह गईं। किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दर्ज हो गया।
कई मामलों में वास्तविक मालिकों के नाम रिकॉर्ड में नहीं मिले। इन गलतियों को ठीक कराने के लिए लोगों को बार-बार संशोधन (बदर) करवाना पड़ा और इसके लिए फीस भी चुकानी पड़ी। तहसीलदार के अनुमोदन के बाद ही रिकॉर्ड सही हो पाता था।

हर रोज 25 से ज्यादा रजिस्ट्रियां
तहसील कार्यालय में प्रतिदिन औसतन 25 जमीन और मकानों की रजिस्ट्री होती है। रजिस्ट्री से पहले जमीन का रिकॉर्ड सही होना आवश्यक होता है। रिकॉर्ड में गड़बड़ी मिलने पर प्रक्रिया रुक जाती थी, जिससे खरीदार और विक्रेता दोनों को परेशानी झेलनी पड़ती थी।


योजनाओं का लाभ लेने में भी आती थी दिक्कत
जमाबंदी में त्रुटियों के कारण लोगों को प्रधानमंत्री आवास योजना, किसान सम्मान निधि, बैंक ऋण तथा अन्य सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अधिकांश योजनाओं में दस्तावेज के रूप में जमाबंदी, इंतकाल और रजिस्ट्री की प्रति अनिवार्य होती है। नगर परिषद से मकान ऋण और अन्य सुविधाओं के लिए भी जमाबंदी की फर्द जमा करानी पड़ती है। अब नई जमाबंदी ऑनलाइन होने से इन प्रक्रियाओं में राहत मिलने की उम्मीद है।


वर्सन:
जमाबंदी को ऑनलाइन कर दिया गया है। आम भू-खंड मालिक जमीन की खरीद-फरोख्त कर सकता है। जमाबंदी की फर्द निकलवा सकता है।- राजेश कुमार, सदर कानूनगाे, राजस्व विभाग।
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