चरखी दादरी। शहर में सफाई कर्मचारियों की हड़ताल शनिवार को 17वें दिन भी जारी रही। हड़ताल के कारण शहर में जमा हो रहे कचरे के ढेर अब नई परेशानी खड़ी करने लगे हैं। शहरवासियों की ओर से विभिन्न स्थानों पर कचरे में आग लगाए जाने की घटनाएं सामने आने से आसपास के क्षेत्रों में धुआं फैल रहा है। इससे लोगों को सांस लेने में परेशानी होने के साथ वायु प्रदूषण बढ़ने का खतरा भी पैदा हो गया है।
शनिवार को सफाई कर्मचारियों ने नगर परिषद कार्यालय से परशुराम चौक तक विरोध-प्रदर्शन किया। इस दौरान कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और लोगों से अपने आंदोलन को समर्थन देने की अपील की। कर्मचारियों ने राहगीरों व दुकानदारों को पंफलेट भी वितरित किए।
हड़ताल के चलते शहर के मुख्य बाजारों, वार्डों, गलियों और सार्वजनिक स्थानों पर कचरे के ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। सफाई कर्मचारियों के अनुसार वर्तमान में शहर में करीब 400 टन कचरा फैला हुआ है। कई स्थानों पर कचरा सड़क किनारे और आबादी वाले क्षेत्रों के नजदीक जमा है।
कचरे की आग से धुएं में घिरे आसपास के इलाके
शहर में जमा कचरे के ढेरों में आग लगाए जाने से सबसे बड़ी चिंता प्रदूषण को लेकर है। कचरा जलने के दौरान निकलने वाला धुआं आसपास के घरों, दुकानों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बन रहा है। हवा के साथ धुआं दूर तक फैल रहा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि लंबे समय से कचरा नहीं उठाया गया है और ढेर लगातार बढ़ते जा रहे हैं। ऐसे में कचरे में आग लगाने की घटनाएं स्थिति को और गंभीर बना सकती हैं।
2022 में 11 दिन तक चली थी हड़ताल
सफाई कर्मचारी प्रधान सूरज कुमार ने बताया कि मांगों को लेकर कर्मचारी पहले भी कई बार आंदोलन कर चुके हैं। वर्ष 2022 में सफाई कर्मचारियों ने 11 दिन तक हड़ताल की थी। इसके बाद इस वर्ष एक मई से 13 मई तक भी कर्मचारी हड़ताल पर रहे थे। उस दौरान सरकार और कर्मचारियों के बीच वार्ता हुई थी लेकिन कर्मचारियों का आरोप है कि उनकी मांगों का स्थायी समाधान नहीं हो पाया।
जल्द समाधान नहीं हुआ तो बिगड़ सकती है स्थिति
सफाई कर्मचारियों ने सरकार से जल्द वार्ता कर मांगों का समाधान करने की मांग की है। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था बहाल करने के लिए ठोस कदम उठाना जरूरी है। वहीं, शहरवासियों को चिंता है कि यदि कचरा उठाने का काम जल्द शुरू नहीं हुआ और कचरे में आग लगाने की घटनाएं जारी रहीं तो शहर में प्रदूषण और गंदगी की समस्या और गंभीर हो सकती है।
कचरा उठाने की पहल का कर्मचारियों ने किया विरोध
जिला प्रधान ने परवाह फाउंडेशन की ओर से कचरा उठाने की पहल किए जाने को लेकर भी सफाई कर्मचारियों ने विरोध जताया है। कर्मचारी प्रधान सूरज कुमार ने कहा कि यदि कोई संस्था हड़ताल के दौरान कचरा उठाने का प्रयास करती है तो कर्मचारी उसका डटकर विरोध करेंगे। उन्होंने सवाल उठाते हुए कहा कि कोरोना काल के दौरान जब सफाई कर्मचारियों ने शहर की सफाई व्यवस्था को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी तब यह संस्था कहां थी। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की मांगों का समाधान किए बिना बाहरी एजेंसी या संस्था के माध्यम से कचरा उठाना आंदोलन को कमजोर करने का प्रयास होगा।
मांगों का समाधान नहीं होने के कारण सफाई कर्मचारी छह अगस्त से लगातार हड़ताल पर हैं। हड़ताल अब 17वें दिन में पहुंच चुकी है। कर्मचारियों का कहना है कि जब तक उनकी मांगों पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, आंदोलन जारी रहेगा।
- सूरज कुमार, इकाई प्रधान, सफाई कर्मचारी संघ।