चरखी दादरी। शहर की सीवर लाइनें जर्जर होने के साथ ही जन स्वास्थ्य विभाग के बेड़े में संसाधनों की कमी भी बनी है। इसके चलते सीवर लाइनों की ब्लॉकेज खोलने में शहर के एक वार्ड का दस दिन बाद नंबर आता है। तब तक वार्डवासी जाम सीवर समस्या से परेशान होते रहते हैं। क्योंकि संसाधन नहीं होने से उनके पास इतना लंबा इंतजार करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। दूसरी ओर अब तक दादरी को सुपर शकर मशीन नहीं मिली है जबकि ज्यादातर ब्लॉकेज जेटिंग मशीन से नहीं खुल पा रही हैं। सुपर शकर मशीन मुहैया कराने का आश्वासन तत्कालीन कृषि मंत्री ओमप्रकाश धनखड़ और मौजूदा कृषि मंत्री जेपी दलाल भी दे चुके हैं।
शहर में सीवर के ब्लॉकेज खोलने के लिए एक वार्ड की मुश्किल से 10 दिनों में बारी आती है। प्रतिदिन 10 से 15 सीवर ब्लॉकेज की शिकायत विभाग को मिल रही हैं। विभाग के पास फिलहाल अपनी एक जेटिंग मशीन है। एक ट्रैक्टर चालित छोटी मशीन निजी ठेकेदार से हायर की हुई है। बीच-बीच में विभाग को भिवानी से सुपर सकर मशीन मंगवानी पड़ रही है तब जाकर काम चल पाता है। इस समय शहर के लिए एक सुपर सकर व एक जेटिंग मशीन की और सख्त जरूरत है तब जाकर सभी 21 वार्डों को समय रहते कवर किया जा सकता है।
इस समय शहर में करीब 80 स्थानों पर सीवर की मेन और अप्रोच लाइनें ब्लॉक हैं जिससे दूषित पानी की निकासी नहीं हो पा रही है। शहर में करीब 175 किलोमीटर लंबी सीवर लाइन है। शहर की सीवर व्यवस्था वैसे ही लंबे समय से लचर चली आ रही है। सीवर की मेन लाइनों में ज्यादा समस्या बनी हुई है। लाइन समय- समय पर रुक जाती हैं जिससे शहर की कॉलोनियों व बाजारों से दूषित पानी की निकासी नहीं हो पाती। दूषित पानी की निकासी के लिए मशीन ही एकमात्र विकल्प है। मशीन से ही ब्लॉकेज लाइन खुल सकती हैं।
- शहर के 21 वार्डों में 70 से ज्यादा कॉलोनी, 90 हजार लोग झेल रहे परेशानी
शहर में 21 वार्ड हैं जिनमें करीब 70 से ज्यादा कॉलोनियां हैं। इन कॉलोनियों की सीवर लाइन मेन लाइन से कनेक्ट हैं लेकिन मेन लाइन ही ब्लॉकेज होने की वजह से कॉलोनियों के दूषित पानी की निकासी नहीं हो पाती। सीवर बैक मार जाते हैं और पानी सड़कों एवं गलियों में जमा हो जाता है। सीवर समस्या का दंश करीब 90 हजार लोग झेल रहे हैं।
- जेटिंग मशीन देकर सुपर शकर मशीन देना भूली सरकार
भाजपा सरकार के पिछले कार्यकाल में शहर को यह एक जेटिंग मशीन उपलब्ध हुई थी। एक मशीन से पूरे शहर को कवर नहीं किया जा सकता है। ऐसे में सीवर लाइन ब्लॉकेज खोलने का काम गति नहीं पकड़ पाता है। सरकार दादरी को सुपर शकर मशीन देना भूल गई है जबकि थोड़ी सी बारिश होने पर कई दिनों तक पानी भरा रहता है जिससे लोगों को आने-जाने में भी परेशानी होती है।
- कभी भिवानी तो कभी रोहतक से उधार ले रहे मशीन
फिलहाल विभाग ने 10 दिनों के लिए भिवानी से सुपर सकर मशीन मंगवा रखी है। इस समय ब्लॉकेज खोलने के लिए सुपर सकर मशीन की मदद ली रही है ताकि ब्लॉकेज खोली जा सके। विभाग के पास तो अपनी एक जेटिंग मशीन है। तंग गलियों में ब्लॉकेज खोलने के लिए निजी ठेकेदार से ट्रैक्टर चालित मशीन हायर की हुई है। खुद की सुपर शकर मशीन न होने से विभाग कभी भिवानी तो कभी रोहतक से सुपर शकर मशीन मंगवाता है।
- पार्षद बोले: जल्द से जल्द दूर हो संसाधनों की कमी, लोग परेशान
पार्षद विनोद वाल्मीकि, मनोज वर्मा, रचना देवी, सुधीर स्वामी, अजय, जयसिंह लांबा और उप-प्रधान संदीप फौगाट का कहना है कि जन स्वास्थ्य विभाग के पास संसाधनों की कमी लोगों पर भारी पड़ रही है। विभाग को जल्द से जल्द संसाधनों का बेड़ा बढ़ाकर सीवर व पेयजल समस्याओं का समाधान करना चाहिए।
वर्जन::
विभाग कर्मचारी आए दिन ब्लॉकेज खोलने में जुटे रहते हैं। जहां से भी शिकायत मिलती है मशीन भेजकर ब्लॉकेज खोली जा रही हैं। पशुपालकों को चाहिए कि वे सीवर लाइन मेें पशुओं का गोबर आदि न डाले। इस वजह से सीवर लाइन जल्दी ब्लॉकेज हो जाती हैं। गोबर से रुकी लाइन को खोलने में भी ज्यादा परेशानी होती है।
-बीके जावला, कनिष्ठ अभियंता, जनस्वास्थ्य विभाग