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एनीमिया का शिकार हो रहे बच्चे, जांच में 50 फीसदी में मिली खून की कमी

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हिमोग्लोबिन जांच के लिए छात्रा के खून का नमूना लेते हुए विशेषज्ञ। - फोटो : CharkhiDadri
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चरखी दादरी। जिले में बच्चे एनीमिया का शिकार हो रहे हैं। इसकी बानगी एनीमिया मुक्त मुहिम के दौरान देखने को मिली है। एक से छह मई तक चलाए गए इस अभियान में 12 हजार बच्चों के खून की जांच की गई। जिनमें से करीब छह हजार में खून की कमी पाई गई। कुछ केस तो ऐसे पाए गए जिनमें महज तीन से छह ग्राम ही खून मिला। ऐसे बच्चों का सिविल अस्पताल में ब्लड ट्रांसफ्यूजन किया जा रहा है और अब तक चार बच्चे इसके तहत कवर हो चुके हैं। बच्चों में खून की कमी होना चिंता का विषय है। अभिभावकों के साथ स्वास्थ्य विभाग को भी इस पर गौर करने की जरूरत है।
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दरअसल स्वास्थ्य विभाग ने एक से छह मई तक एनीमिया मुक्त भारत अभियान चलाया। इसके तहत स्कूल हेल्थ की टीमों ने अलग-अलग स्कूलों में जाकर बच्चों के हिमोग्लोबिन की जांच की। करीब छह दिन तक चले अभियान के तहत तीन अलग-अलग आयु वर्ग में बच्चों के खून की जांच की गई। इसमें करीब 50 फीसदी बच्चों में खून की कमी पाई गई। उन्हें स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयु वर्ग के हिसाब से टेबलेट और सिरप दिए गए। विभाग की ओर से करीब 25 हजार टेबलेट और 800 से अधिक सिरप बच्चों को खून की कमी दूर करने के लिए दिए गए।
दूसरी ओर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और सिविल अस्पताल की टीम ने भी बच्चों में हिमोग्लोबिन की जांच की। यहां भी करीब पचास फीसदी में खून की कमी पाई गई। टीमों ने अपना-अपना डाटा एनीमिया एलीमिनेशन-डे पोर्टल पर अपलोड कर दिया है। वहीं, स्वास्थ्य विशेषज्ञों की मानें तो अभिभावकों को बच्चों की डाइट पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है।
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जानिये.... किस आयु वर्ग के कितने बच्चों में पाई गई खून की कमी
1. एक से पांच साल : इस आयु वर्ग के बच्चों में 14 से 15 ग्राम खून होना चाहिए। इस आयुवर्ग में करीब 813 बच्चों में खून की कमी पाई गई। उन्हें विभाग की टीम की ओर से आयरन टेबलेट सिरप दी गई है। इसका नियमित सेवन करना होगा।
2. छह से 9 साल : इस आयु वर्ग के बच्चे में 12 से 13 ग्राम खून होना जरूरी है। लेकिन जब स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने अभियान के दौरान बच्चों की जांच की तो करीब साढ़े तीन हजार बच्चों में खून की कमी मिली। इन्हें दवा वितरित की गई। जिसे खून की मात्रा अनुसार प्रतिदिन और सप्ताह में एक बार लेने की सलाह दी गई है।
3. 10 से 18 साल : इस आयु वर्ग के किशोर व किशोरी में खून की मात्रा 12 से 13 ग्राम होनी चाहिए। इस आयु वर्ग में विभाग ने आयरन की करीब 16 हजार गोलियां वितरित की है। इस आयु वर्ग के 1500 किशोर-किशोरियों में खून की कमी पाई गई है।
दस से अधिक बच्चों में तो बेहद कम मिला खून, चार पहुंचे अस्पताल
स्वास्थ्य विभाग के सूत्रों के अनुसार इन तीनों आयु वर्ग में करीब दस बच्चे ऐसे मिले, जिनमें खून की मात्रा सिर्फ 3 से 6 ग्राम है। जिन बच्चों में खून काफी कमी है, उनमें से चार सिविल अस्पताल पहुंचकर ब्लड ट्रांसफ्यूजन करवा चुके हैं और यह सिलसिला अभी जारी है।
सलाह : इन बातों का रखें ख्याल
- बच्चों को हरी सब्जियों का नियमित सेवन करवाएं।
- मौसम के अनुसार बच्चों को फल खिलाएं।
- बच्चों को जितना हो सके फास्ट फूड देने से बचें।
- खून की कमी मिलने पर आयरन गोली खिलाएं।
देश को एनीमिया मुक्त बनान के लिए अभिभावकों का जागरूक होना बेहद जरूरी है। सरकार के निर्देशों पर स्वास्थ्य विभाग इस संबंध में मुहिम भी चलाता है। जिन बच्चों में खून की कमी पाई गई है उन पर हमारी निगरानी है। अभिभावकों से अपील है कि बच्चों को पौष्टिक भोजन खिलाएं और उन्हें फास्ट फूड देने से बचें।
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-डॉ. सुदर्शन पंवार, सीएमओ, चरखी दादरी

बच्चों के खून की जांच करने राजकीय स्कूल में पहुंची स्कूल हेल्थ टीम।- फोटो : CharkhiDadri

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