चरखी दादरी। मानसून सीजन के बाद अब जिले के 58 जलघरों की सफाई की दरकार है। इसके अलवा शहर के जलघर के टैंक की क्षतिग्रस्त दीवार भी अब तक जन स्वास्थ्य विभाग ने ठीक नहीं कराई है। टैंकों की सफाई व मरम्मत न होने से सीधा असर पानी की गुणवत्ता पर पड़ रहा है। हालांकि विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही जलघर टैंकों की सफाई करवा दी जाएगी।
मानसून सीजन बीतने के बाद अब जिले के सभी जलघरों में वाटर टैकों की गाद एवं सफाई करने की जरूरत है। यह समय टैंकों की सफाई के लिए उपयुक्त माना जाता है। जिले की नहरों में दो माह से अधिक समय तक लगातार बरसात में पहाड़ों का पानी आया है। इस पहाड़ों के पानी में भारी मात्रा में मिट्टी पानी के साथ बहकर आई। नहरी पानी से ही वाटर टैंकों में पानी डाला जाता है। ऐसे में जलघरों की सफाई करने की सख्त जरूरत बनी हुई है ताकि पानी की गुणवत्ता में सुधार आए और लोगों को पीने का शुद्ध पानी मिल सके। इस समय तकरीबन सभी जलघरों के वाटर टैंकों में मिट्टी, कचरा व गाद आदि का जमाव बना हुआ है। विभाग को इस दिशा में अलग से जल्द ही काम शुरू करने की जरूरत है।
शहर में सात बूस्टिंग स्टेशन हैं। इनके पानी में क्लोरिन की मात्रा अक्सर काफी कम पाई जाती है। गांव व शहर में बने जलघरों की सफाई की सख्त जरूरत बनी हुई है। सभी वाटर टैंकों की स्थिति खराब बनी हुई है। कई भागों में स्थित बूस्टिंग व वाटर टैंकों में बारिश का पानी भी घुस जाता है। उसके साथ मिट्टी भी जमा हो जाती है इससे पानी की गुणवत्ता पर असर पड़ने लगा है। लंबे समय तक गाद व मिट्टी का जमाव होने की वजह से सप्लाई होने वाले पानी में क्लोरिन दवा का मिश्रण करने पर भी अजीब प्रकार की गंध आने लगती है। ऐसे में यह पानी घरेलू कार्यों में उपयोग नहीं हो पाता।
पार्षद बोले : जल्द सफाई करवाए विभाग
महिला पार्षद बबीता देवी, रचना देवी, नप उप-प्रधान संदीप फौगाट, मंजू पहल, सुधीर स्वामी व मनोज वर्मा आदि का कहना है कि विभाग को वाटर टैंकों की सफाई करवानी चाहिए। लंबे समय से टैंकों की सफाई नहीं हुई है और गाद का जमाव बनने से पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता प्रभावित है।
अधिकारी बोले
विभाग समय-समय पर वाटर टैंकों की सफाई करवाता है। अगर अब पानी खराब हुआ है तो टैंकों की सफाई करवा दी जाएगी। विभाग पानी की गुणवत्ता की जांच भी करवाता है।
-जगदीशचंद्र, एसडीओ, जन स्वास्थ्य विभाग