चरखी दादरी। आर्यवीर दल ओर से आर्य हिंदी संस्कृत महाविद्यालय गुरुकुल में सात दिवसीय जिलास्तरीय आवासीय व्यायाम प्रशिक्षण एवं चरित्र निर्माण शिविर लगाया गया है। शिविर का शुभारंभ आर्यवीर दल जिला संचालक स्वामी सच्चिदानंद ने ध्वजारोहण के साथ किया।
स्वामी सच्चिदानंद ने आर्यवीरों को मनुष्य की परिभाषा एवं उसके मुख्य कर्तव्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि मनुष्य वही होता है जो मननशील होकर अपने समान अन्यों के सुख-दुख और हानि-लाभ को समझे व अन्यायकारी बलवान से भी न डरे। मनुष्य के लिए मनन करने के अनेक विषय होते हैं। प्रथम विषय स्वयं को जानना है। परमात्मा ने मनुष्य को बुद्धि मनन करने के लिए ही दी है।
अतिथि अनिल शास्त्री ने कहा कि हमें जीवन मनुष्य बनने और विवेक प्राप्त करने के लिए ही मिला है। हम इस ऐश्वर्य को प्राप्त करने का प्रयत्न नहीं करते। संसार में सत्य व असत्य को जानने व सत्याचरण करने वाले मननशील मनुष्य बहुत कम हैं। उन्होंने कहा कि सत्याचरण तभी हो सकता है कि जब मनुष्य को सत्य व असत्य का ज्ञान हो। देश में सभी ऋषि, मुनि व योगियों सहित राम, कृष्ण, चाणक्य, महर्षि दयानंद आदि सत्याचरण करते थे। इसी कारण इनका जीवन आदर्श जीवन था। हम सभी को इनके जीवन का अनुकरण करना चाहिए। इससे ही हम मननशील व विवेकवान बनेंगे।
शिविर में अध्यक्ष व गुरुकुल संचालक आचार्य प्रवीण योगी, आर्यवीर दल व्यायाम शिक्षक वैद्य अनिल शास्त्री, व्यवस्थापक रितेश शास्त्री, प्रोफेसर विरेंद्र, दिनेश शास्त्री, कर्मवीर आर्य, सुखेंद्र गोरीपुर, जयप्रकाश, व्यायाम शिक्षक रोहित शास्त्री, राहुल आर्य, पुनीत, सन्नी आर्य, अंकुर आदि मौजूद रहे।