सुर्खियों में रहने वाले चरखी दादरी आरटीए कार्यालय में अब 20 लाख 63 हजार 300 रुपये के गबन का मामला सामने आया है। गबन और किसी ने नहीं बल्कि 11 माह तक कैशियर का पद संभालने वाले कर्मचारी ने ही किया है। एडीसी एवं आरटीए मोहम्मद इमरान रजा की शिकायत पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ 409 आईपीसी के तहत केस दर्ज कर लिया है। आरोपी गत दिसंबर माह में सस्पेंड हो चुका है। फिलहाल उसकी गिरफ्तारी नहीं हुई है।
इस संबंध में एडीसी एवं आरटीए मोहम्मद इमरान रजा की तरफ से गत 16 मार्च को एसपी कार्यालय में शिकायत दी गई थी। शिकायत की जांच उपरांत सदर थाना पुलिस ने इस संबंध में सोमवार शाम आरोपी के खिलाफ केस दर्ज किया है। आरटीए मोहम्मद इमरान रजा ने शिकायत में बताया था कि नरेंद्र बूरा नामक कर्मचारी ने 25 लाख 28 हजार 830 रुपये की धनराशि सरकारी खजाने में जमा नहीं करवाई। कार्यालय की तरफ से राशि जमा कराने के लिए नरेंद्र बूरा को पत्र भी भेजे गए। इसके अलावा उसे मौखिक रूप से भी कैश जमा कराने की बात कही गई लेकिन उसने अमल नहीं किया।
बाद में उसने चार लाख 65 हजार रुपये की राशि बैंक में जमा करवा दी लेकिन इसके बाद बची राशि अब तक सरकारी खजाने में जमा नहीं करवाई। कर्मचारी की गफलतबाजी के चलते सरकार ने उसे सस्पेंड करने और एफआईआर दर्ज कराने के आदेश दिए थे। अमर उजाला से बातचीत में एडीसी एवं आरटीए ने बताया कि उक्त कर्मचारी 11 माह तक कैशियर के पद पर कार्यरत्त रहा और उस समयावधि में ही यह गबन किया गया है। उन्होंने बताया कि एफआईआर दर्ज करने के लिए गत मार्च माह में ही एसपी ऑफिस में शिकायत भेज दी गई थी और पुलिस ने अब केस दर्ज किया है।
रिकॉर्ड मिलान करने पर पकड़ा गया आरोपी, दो दिन के कैश में हेरफेर
एडीसी एवं आरटीए मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि तत्कालीन आरटीए और सहायक सचिव ने ऑफिस के रिकॉर्ड का मिलान किया तो कैशियर के करीब 25 लाख 28 हजार का कैश जमा न कराने की बात सामने आई। सूत्रों के अनुसार रिकॉर्ड की गहनता से जांच की गई तो जो राशि कैशियर ने बैंक में जमा नहीं करवाई है वो छह और सात अक्तूबर 2019 की है।
सस्पेंड होने के छह माह बाद दर्ज हुई एफआईआर
एडीसी मोहम्मद इमरान रजा ने बताया कि कैश जमा न कराने की बात सामने आने पर मुख्यालय को इस संबंध में सूचित किया गया था। इसके बाद परिवहन आयुक्त ने कैशियर नरेंद्र बूरा को सस्पेंड करने के आदेश दिए थे। इसके अलावा उस पर एफआईआर भी दर्ज कराने के आदेश सरकार की तरफ से दिए गए थे। उस समय टीएएसई एवं कैशियर का पद संभालने वाले नरेंद्र बूरा को सस्पेंड कर दिया गया था और अब छह माह बाद एफआईआर दर्ज कराई गई है।
1997 में भर्ती हुआ था नरेंद्र
आरटीए स्टाफ के मुताबिक 2019 में नरेंद्र ने 11 माह तक कैशियर का पद संभाला था। इस दौरान चालान और अन्य कार्यों की एवज में जमा होने वाला कैश उसके पास ही जमा हुआ। नरेंद्र 1997 में आरटीए कार्यालय में भर्ती हुआ था। वह करीब 23 साल की नौकरी पूरी कर चुका है।
पत्राचार के बाद जमा करवाए चार लाख 65 हजार
एडीसी ने बताया कि नरेंद्र बूरा को विभाग की तरफ से राजस्व जमा कराने के लिए पत्र लिखे गए थे। कई दफा पत्र लिखने के बाद उसने दो बार में चार लाख 65 हजार रुपये बैंक में जाकर जमा करवाए लेकिन इसके बाद बचे 20 लाख 63 हजार जमा कराने में रुचि नहीं दिखाई। एक बार उसने बैंक में दो लाख 10 हजार 500 और दूसरी बार दो लाख 54 हजार 500 रुपये जमा करवाए है।
कैशियर नरेंद्र बूरा को सरकार के आदेशों पर पहले ही सस्पेंड किया जा चुका है और अब उसके खिलाफ मामला भी दर्ज करवा दिया गया है। करीब 20 लाख 63 हजार 300 रुपये उसने अभी भी जमा नहीं करवाए है।
मोहम्म्द इमरान रजा, एडीसी एवं आरटीए, चरखी दादरी
आरटीए की तरफ से एसपी कार्यालय में एक शिकायत पत्र प्राप्त हुई थी। शिकायत के आधार पर आरटीए ऑफिस के कैशियर नरेंद्र बूरा के खिलाफ 409 आईपीसी के तहत केस दर्ज किया गया है।
नरेंद्र दहिया, सदर थाना प्रभारी