सर्दी में पशु महसूस करता है तनाव, प्रतिराेधक क्षमता बढ़ाने के लिए हरा चारा व खनिज मिश्रण खिलाएं
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। सर्दी के मौसम में पशुपालक दुधारू पशुओं का रख-रखाव ठीक प्रकार से करें। खासकर दुधारू पशुओं को रोजाना संतुलित मात्रा में खनिज मिश्रण एवं हरे चारे का सेवन करवाएं। मेथी व गुड़ अवश्य खिलाएं। ताकि, सर्दी को झेलने के लिए पशु की इम्युनिटी मजबूत बनी रहे। साथ ही दूध की मात्रा में कमी न होने पाए।
कम तापमान को शरीर के इम्युन सिस्टम के अनुरूप डायवर्ट करने में पशु की अतिरिक्त कैलोरी की खपत होती है। इससेे वह तनाव में आ जाता है। दूध की मात्रा कम हो जाती है। इस वजह से पशु के शरीर में दूध का उत्पादन कम होने लगता है।
जिले में सभी प्रकार की प्रजातियों के पशुओं की संख्या 1.98 लाख है। इनमें करीब 42 हजार दुधारू पशु भी शामिल हैं। पशुपालन विभाग की ओर से समय-समय पर पशुओं में टीकाकरण अभियान भी चलाए जाते हैं। पिछले दिनों वैक्सीन इंजेक्शन लगाए गए थे। ताकि, मुंह-खुर नामक गंभीर बीमारी से पशुओं का बचाव हो सके। इस टीके से पशुओं का दूध भी कम नहीं होता। यह नई तकनीक का टीका है। विभाग के चिकित्सकोंं की ओर से समय-समय पर पशुपालकों को विविध नई जानकारी भी दी जाती है। दुग्ध प्रतियोगिताएं भी ऑनलाइन करवाई जा रही हैं।अब भीषण ठंड में पशुओं में दूध उत्पादन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ना स्वाभाविक है।
पशु रोग विशेषज्ञों का मानना है कि सामान्य से कम तापमान होने पर पशु तनाव महसूस करता है। ऐसे में पशुओं की देखरेख पर विशेष ध्यान देना चाहिए। भीषण ठंड में दुधारू पशुओं में कम तापमान को शरीर के इम्युन सिस्टम के अनुरूप डायवर्ट करने के लिए सामान्य से अधिक ऊर्जा की खपत होती है। ऐसे में ठंड से बचाव में ही पशु की बहुत सारी ऊर्जा की खपत हो जाती है। इस वजह से पशु के शरीर में दूध का उत्पादन कम होने लगता है।
- ठंड में ये करें उपाय
पशु चिकित्सकों के अनुसार, दूध की मात्रा बनी रहे, इसके लिए पशुओं को खनिज मिश्रण खिलाएं। ताकि, उसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कम न होने पाए। इसके लिए हरे चारे का सेवन करवाया जाए। पशुओं को रोजाना 100 से 150 ग्राम तक गुड़ व इतनी ही मात्रा में मेथी जरूर खिलाएं। इससे पशु के शरीर का तापमान अनुकूल बना रहेगा और उसे इतनी ठंड महसूस नहीं होगी। पशु रोग विशेषज्ञों का मानना है कि दुधारू पशु के लिए अनुकूल वातावरण का होना अति जरूरी है।
- ये सावधानी बरतें
पशु को ज्यादा ठंडा पानी नहीं पिलाना चाहिए। धूप खिलने पर ही पशु को बाहर निकालें अन्यथा नहीं। पशु के बांधने की जगह को सूखा रखें, वहां नमी एवं गीलापन नहीं होना चाहिए। इसके अलावा जो पशुपालक मैट का इस्तेमाल करते हैं, वे पशु के इस मैट की रोजाना सफाई करें। मैट न होने की अवस्था में धान की पराली व अन्य सूखा भूसा पशु के बैठने की जगह डाली जा सकती है। ठंड में पशु को अचानक बाहर न निकालें।
वर्सन:
ठंड में पशु तनाव महसूस करने लगता है। इसका असर दूध की मात्रा पर पड़ता है। पशुओं को मैट पर बांधे क्योंकि रेत ठंडी रहती है। पशु के बांधने की जगह को प्रतिदिन साफ करें। हरा चारा व खनिज मिश्रण का सेवन कराएं।
-डॉ. जसवंत जून, डिप्टी डायरेक्टर, पशुपालन विभाग
फोटो-14
पशुपालक के घर बंधी भैंस। संवाद