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Charkhi Dadri News: कोर्ट परिसर में अधिवक्ताओं को खल रही बैंक शाखा की कमी

Tue, 17 Dec 2024 12:17 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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कोर्ट::
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बैंक संबंधी कार्य के लिए अधिवक्ता लगा रहे 500 से एक हजार मीटर दूर स्थित बैंक शाखाओं के चक्कर, कोर्ट कार्य निपटाने में आ रही परेशानी
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। दादरी कोर्ट परिसर में बैंक शाखा की कमी खल रही है। इसके कारण अधिवक्ताओं को कोर्ट के कार्य में परेशानी हो रही है। बार एसोसिएशन की ओर से भी मिनी बैंक शाखा खोलने की मांग उठाई गई, लेकिन, अब तक मांग परवान नहीं चढ़ी है।

अधिवक्ताओं ने बताया कि बैंक शाखा की काफी जरूरत है। उन्हें मुवक्किल की फीस जमा करवाने के लिए बैंक की जरूरत होती है। इसके लिए उन्हें कोर्ट परिसर से बाहर जाना पड़ता है या अपने साथी के माध्यम से रुपये जमा करवाने पड़ते हैं। बुजुर्ग लोग फोन सुविधा का उपयोग नहीं कर पाते और उनकी फीस नकद होती है। रुपये निकलवाने के लिए एटीएम की सुविधा है, लेकिन, जमा कराने का प्रबंध नहीं है।
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इनके अलावा, कुछ लोग ऑनलाइन पेमेंट सुविधा प्रयोग नहीं करते और कुछ लोग अपनी लंबित फीस चेक के माध्यम से देते हैं। लेकिन, पास रखने का भी स्थायी जरिया नहीं है और बैंक जाने में अधिक समय लगता है। इससे उनका कोर्ट का कार्य प्रभावित रहता है। दूसरी ओर अगर वे लंच समय में जाएं तो लंच नहीं कर पाते और बाद में जाएं तो कोर्ट कार्य रहता है। अगर एक मिनी शाखा भी कोर्ट परिसर में हो तो अधिवक्ताओं का कार्य बाधित नहीं होगा और वे चिंतामुक्त होकर अपना कार्य कर सकेंगे।

अधिवक्ता बोले : कोर्ट परिसर में हो बैंक शाखा की सुविधा
- अगर कोर्ट परिसर में बैंक शाखा की सुविधा हो तो काफी राहत मिलेगी। इससे अधिवक्ताओं का समय बर्बाद होने से बच जाएगा और कोर्ट कार्य भी प्रभावित नहीं होगा।
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-सूरज खुराना, अधिवक्ता

- अगर फीस जमा कराने बैंक जाते हैं तो कई बार लाइन में लगना पड़ता है और वहां काफी समय बर्बाद हो जाता है। दूसरी ओर कोर्ट भी समय पर नहीं पहुंच पाते।
-संदीप फोगाट, अधिवक्ता

- लंबित और कई मुवक्किलों की फीस एक साथ आती है तो उसे हाथोंहाथ जमा कराना जरूरी हो जाता है। ऐसे में दादरी कोर्ट परिसर में बैंक शाखा की कमी खलती है।
-संदीप कुमार, अधिवक्ता

वर्सन:
प्रशासन को बैंक शाखा की व्यवस्था के लिए अवगत कराया गया है और अधिवक्ताओं की परेशानी भी बताई गई है। मुवक्किल ऑनलाइन पेमेंट करने लगे हैं तो कुछ राहत मिली है, लेकिन, फिर भी पूरी तरह समाधान नहीं हुआ है। अधिकतर फीस नकद आती है। इसलिए प्रशासन को इस पर संज्ञान लेना चाहिए।
-नसीब राणा, प्रधान, बार एसोसिएशन

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दादरी कोर्ट परिसर स्थित एटीम। संवाद
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बार एसोसिएशन प्रधान नसीब राणा।
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सूरज खुराना।
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संदीप फोगाट।
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संदीप कुमार।
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