चरखी दादरी। जिले की अनाज मंडियों में बाजरे की सरकारी खरीद रफ्तार नहीं पकड़ पा रही है। अब तक महज 70 क्विंटल बाजरे की सरकारी खरीद हुई है जबकि गुणवत्ता जांच में 68 नमूनों में से 64 फेल हो गए। दूसरी ओर बाजार भाव बढ़ने से किसानों का रुख प्राइवेट खरीद की तरफ होता जा रहा है।
सरकार ने बाजरे का समर्थन मूल्य (एमएसपी) 2900 रुपये प्रति क्विंटल पर खरीद करने के लिए बाजार भाव 2,300 रुपये प्रति क्विंटल तय किया है जबकि निजी व्यापारी 2,305 रुपये या इससे अधिक भाव दे रहे हैं। ऐसे में किसान सरकारी खरीद के बजाय निजी बाजार में फसल बेचना पसंद कर रहे हैं।
68 में से केवल चार सैंपल पास
सरकारी खरीद के लिए गुणवत्ता जांच में अब तक लिए गए 68 नमूनों में से केवल चार पास हुए जबकि 64 निर्धारित मानकों पर खरे नहीं उतरे। जांच में नमी, बाहरी कचरा, दानों का रंग खराब होना और कीटों का प्रभाव प्रमुख कारण बताए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, कीट प्रभावित दानों की स्वीकार्य सीमा एक प्रतिशत है जबकि जांच में यह मात्रा 1.5 से दो प्रतिशत तक मिली है।
पोर्टल और टोकन व्यवस्था पर किसानों के सवाल
किसानों ने ‘मेरी फसल-मेरा ब्योरा’ पोर्टल पर जमीन का रकबा कम दर्ज होने और टोकन में उपज की मात्रा घटाने के आरोप लगाए हैं। एक किसान के अनुसार, 10 किले जमीन होने के बावजूद पोर्टल पर केवल पांच किले दर्ज हैं। वहीं महराणा निवासी किसान राजकुमार ने बताया कि 20 से 25 क्विंटल बाजरा होने के बावजूद उन्हें केवल 10 क्विंटल का टोकन दिया जा रहा है। उन्होंने टोकन वितरण में भी सिफारिश चलने का आरोप लगाया है।
पारदर्शी खरीद की मांग
गांव समसपुर निवासी किसान भूपेंद्र ने प्रशासन से जमीन का रिकॉर्ड दुरुस्त करने टोकन वितरण में पारदर्शिता लाने और पात्र किसानों की पूरी उपज खरीदने की मांग की है।
वर्जन
बाजार में बाजरे के भावों मेंं तेजी है। इस कारण किसान प्राइवेट खरीद की तरफ झुक रहे हैं। हमने खरीद के लिए सैंपल लिए थे। जिनमें से अधिकांश फेल आए हैं। इस कारण खरीद नहीं की जा सकी। सरकारी खरीद निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही की जा रही है। -रामनारायण, हैफेड मैनेजर