बाढड़ा। बढ़ते तापमान के कारण गेहूं, सरसों, जौ की फसलों की सिंचाई में भी तेजी आ गई है। फसलों पर गर्मी की मार रोकने के लिए ज्यादा सिंचाई करने के लिए नलकूपों में बिजली आपूर्ति की मांग बढ़ने से क्षेत्र के तीन दर्जन से अधिक फीडर ओवरलोड हो गए हैं। इससे निगम की परेशानियां भी बढ़ गई हैं। सभी फीडरों पर आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक शेड्यूल में एक ही फीडर पर दो चरणों में निगम द्वारा आपूर्ति की जा रही है।
दक्षिणी हरियाणा के रेतीले क्षेत्र में भूमिगत जल स्तर काफी नीचे होने व नहरी पानी न के बराबर होने से रबी व खरीफ सीजन की फसलों में सिंचाई का 90 प्रतिशत कार्य बिजली संचालित नलकूपों पर निर्भर हैं। फरवरी माह में बरसात न होने से गेहूं व सरसों के पौधों को अंतिम सिंचाई के लिए पानी की आवश्यकता होने पर बिजली निगम पर सबसे अधिक दबाव आता है। अब दो सप्ताह से लगातार तेज गर्मी के कारण गेहूं, सरसों, चने की फसलें जल्दी-जल्दी सिंचाई की जरूरत महसूस कर रही हैं।
दक्षिण हरियाणा बिजली वितरण निगम द्वारा उपमंडल के दर्जनों गांवों को 132 केवीए बिजली सब स्टेशन बाढड़ा, बेरला, कादमा व पिचौपा कलां, लाड, मांढी, बेरला, काकड़ौली, द्वारका आदि 33 केवीए बिजली घरों से कृषि, घरेलू व कॉमर्शियल आपूर्ति की जा रही है। लेकिन फिलहाल केवल कृषि क्षेत्र का फीडर ही ओवरलोड की समस्या से जूझ रहा है। काकड़ौली बिजली घर प्रभारी जगत सिंह जीतपुरा ने बताया कि रबी सीजन में बरसात की देरी से हर बार यही हालात पैदा होते हैं लेकिन निगम पूरी मुस्तैदी के साथ जुटा हुआ है।
किसान सत्यपाल सिंह, रामफल, बलवान श्योराण, सतबीर सिंह आदि ने बताया कि फरवरी माह के दूसरे सप्ताह के बाद भी बरसात नहीं होने से कृषि क्षेत्र में सिंचाई की जरूरत बढ़ जाती है। क्षेत्र के किसान जल्द से जल्द फसलों की सिंचाई करना चाहते हैं लेकिन सभी फीडरों पर एक साथ आपूर्ति होने से दबाव बढ़ रहा है। जिससे अघोषित कट लग रहे हैं। उन्होंने निगम से कृषि क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में बढ़ोतरी की मांग की है।
रबी फसलों में सिंचाई का दौर शुरू होता है तो फीडरों पर ओवरलोड की समस्या आती ही है। निगम प्रत्येक फीडर को पहले से निर्धारित शेड्यूल के हिसाब से आपूर्ति कर रहा है। एक-दो फीडरों पर ज्यादा दबाव बढ़ता है तो उन्हें दो चरणों में चलाया जाता है।
-एसडीओ रामसिंह, बिजली निगम, बाढड़ा।