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स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने में आर्य समाज का है महत्वपूर्ण योगदान : आचार्या जया

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चरखी दादरी। दादरी स्थित आर्य समाज मंदिर का वार्षिक महोत्सव एवं सम्मेलन का शनिवार को शुभारंभ हुआ। इस दौरान हवन किया गया। आर्य हिंदी-संस्कृत महाविद्यालय के प्राचार्य प्रवीण आर्य यज्ञ ब्रह्मा रहे। पुरोहित नितिन शास्त्री ने मंत्रोच्चारण के साथ हवन करवाया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रधान कर्मवीर सिंह छिकारा ने की।
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बिजनौर उत्तर प्रदेश से पधारे भजनोपदेशक नरेश मुनि वानप्रस्थी ने कहा कि परमात्मा आत्म ज्ञान का दाता है। वह मन एवं भावनाओं को नेक रास्ते पर रखता है। उन्होंने कहा कि आत्म ज्ञान से धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष की प्राप्ति संभव है। उन्होंने कहा कि सुख एवं मोक्ष की प्राप्ति ईश्वर का नाम स्मरण करने से होती है। भजनोपदेशक नरेश मुनि ने स्वामी दयानंद के जीवन संस्मरण से यर्थाथ ज्ञान की प्राप्ति कर जीवन सफल बनाने की अपील की।
मेरठ से पधारे युवा भजनोपदेशक संदीप आर्य गिल ने अपने भजन के माध्यम से कहा कि अज्ञान रूपी अंधेरे के कोहरे से ईश्वर की अनुभूति नहीं होती, जबकि वह कण-कण में विराजमान है। संदीप आर्य गिल ने कहा कि वेद पढ़ना प्रत्येक भारतीय का परम धर्म है। इससे अज्ञान की दूरी और ज्ञान की प्राप्ति संभव है। उन्होंने स्वाध्याय व चिंतन करने पर बल दिया।
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महामंत्री सोमवीर सिंह आर्य ने बताया कि दूसरा सत्र आचार्या जया आर्या की अध्यक्षता में प्रारंभ हुआ। गुरुकुल पंचगांव की ब्रह्मचारिणी रिया ने मां की भूमिका पर वक्तव्य प्रस्तुत किया। आचार्या जया आर्या ने महिलाओं के उत्थान में महर्षि दयानंद की भूमिका का वर्णन किया। आर्या ने कहा कि स्त्री शिक्षा को बढ़ावा देने में आर्य समाज का महत्वपूर्ण योगदान है।
इस दौरान बबीता आर्या, पूर्व एसडीएम इंद्र सिंह बोहरा, कर्मवीर छिकारा, डीडी आर्य, श्यामसुंदर चाबा, डाॅ. सीपी चावला, राम सिंह श्योराण, रामकिशन आर्य, राजेश आर्य, सुकर्मपाल आर्य, टेकराम आर्य, अभिनव आर्य आदि मौजूद रहे।
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