संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। नगर परिषद की ओर से शहर की सफाई व्यवस्था पर सालाना करीब नौ करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं, इसके बावजूद व्यवस्था पटरी पर नहीं है। हाल ही में घोषित स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणाम में दादरी नगर परिषद की रैंक बेहद निराशाजनक रही है। अब अधिकारी इसमें सुधार की योजना पर काम कर रहे हैं। इसके लिए सभी सफाई दरोगाओं को निर्देश भी दिए गए हैं। एजेंसी को भी रूट चार्ट बनाने के निर्देश दिए हैं।
अगस्त से शहर में सफाई की नई व्यवस्था लागू है। इसके तहत अस्थायी डंपिंग प्वाइंट्स और करीब 20 हजार घरों से कचरे का उठान एजेंसी की टीमें कर रही हैं, जबकि शहर की सफाई का जिम्मेदारी नगर परिषद के 204 कर्मचारियों के भरोसे हैं। स्वच्छता सर्वेक्षण के परिणाम पर गौर करें तो नगर परिषद सफाई कर्मचारियों का काम कम होने के बाद भी व्यवस्था सुधरने के बजाय बिगड़ी है। गत वर्ष जहां स्वच्छता सर्वेक्षण में प्रदेश स्तर पर चरखी दादरी नगर परिषद की 8वीं और राष्ट्रीय स्तर 58वीं रैंक थी। इसे बार प्रदेश स्तर की रैंक 18 और राष्ट्रीय स्तर की रैंक 1863 पहुंच गई हैं।
शहर के कई पार्षद इस व्यवस्था के खिलाफ मोर्चा खोल चुके हैं। उन्होंने कचरा उठान के टेंडर को रद्द करने और सफाई कार्य में किए जा रहे भेदभाव को खत्म करने की मांग की है। पार्षद जयसिंह लांबा, मुनेश दहिया, रचना देवी, अजय सांगवान, नवीन प्रजापति व सुधीर स्वामी आदि का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था कतई सही नहीं है। शहर को स्वच्छ बनाने के लिए प्रशासन को हस्तक्षेप कर व्यवस्था में सुधार करवाना चाहिए। पार्षदों ने बताया कि सफाई की नई व्यवस्था लागू होने से एक समस्या और बनी है। वार्डाें की नालियों से गाद का उठान न तो नगर परिषद के कर्मचारी करते हैं और न ही एजेंसी के। ऐसे में गंदगी पड़ी रहने से नालियां ब्लॉक रहती हैं।
ऐसे नौ करोड़ रुपये सालाना खर्च आने का अनुमान
नगर परिषद के पास 204 सफाई कर्मचारी हैं। इनमें से 50 पक्के हैं और उनका वेतनमान 40 से 60 हजार रुपये है। इसी प्रकार 111 आउटसोर्सिंग पॉलिसी के तहत लगे हैं और उनका वेतनमान 18,000 रुपये है। 43 सफाई कर्मचारी आउटसोर्सिंग पॉलिसी-2 के तहत लगे हैं और इनका वेतनमान साढ़े 13 हजार रुपये है। सालाना इन कर्मचारियों का वेतनमान करीब 6 करोड़ रुपये बनता है। इसके अलावा डोर-टू-डोर कचरा उठान का खर्च भी करीब तीन करोड़ रुपये बनता है।
सार्वजनिक शौचालय और पार्क बदहाल
शहर में 1200 से अधिक गलियां हैं। करीब 20 फीसदी गलियां ऐसी हैं, जिनमें कई दिन में झाडू लगती है। इसके अलावा शहर में 12 सार्वजनिक शौचालय हैं। इनमें से ज्यादातर में सफाई व पानी का प्रबंध नहीं है। पार्क भी बदहाल पड़े हैं। यह तमाम ऐसे बिंदू हैं जिनके चलते इस बार शहर स्वच्छता सर्वेक्षण में पिछड़ा है।
एजेंसी को दिए जा चुके हैं 17 वाहन
कचरा उठान का कार्य करने वाली एजेंसी को नगर परिषद अधिकारी 17 वाहन दे चुके हैं। ऐसे में अब नगर परिषद के पास 6 ही संसाधन बचे हैं। संसाधन देने के साथ चालकों को भी हटाया गया। नगर परिषद के पास अब चालकों की कमी भी बनी हुई है। कई दिनों से स्वीपिंग मशीन सड़कों पर नहीं चल पाई है।
नगर परिषद के पास सफाई संबंधी संसाधन
संसाधन- संख्या
पक्के कर्मचारी : 50
कच्चे कर्मचारी : 154
ट्रैक्टर : 3
ऑटो टीपर : 1
स्वीपिंग मशीन : 1
सफाई व्यवस्था में जल्द ही सुधार देखने को मिलेगा। सभी सफाई दरोगाओं को दिशा- निर्देश दिए गए हैं। वहीं, नगर आयुक्त एजेंसी को रूट चार्ट तैयार कर नगर परिषद को सौंपने के निर्देश पहले ही दे चुके हैं। चरखी दादरी को स्वच्छ और सुंदर बनाने के लिए शहरवासियों से भी सहयोग की अपेक्षा है। - बक्शीराम सैनी, चेयरमैन, नगर परिषद
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टूटी पड़ी नगर परिषद के सफाई कर्मचारी की रेहड़ी। संवाद
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बस स्टैंड रोड पर डस्टबिन के बाहर पड़ा कचरा। संवाद
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चेयरमैन बक्शीराम सैनी।