चरखी दादरी। एक साल के इंतजार के बाद शहर की नई जमाबंदी का अंतिम प्रारूप तैयार कर स्वीकृति के लिए चंडीगढ़ भेज दिया गया है। स्वीकृति मिलते ही शहर की जमीन का रिकॉर्ड दोबारा ऑनलाइन हो जाएगा जिससे मकानों और भूखंडों की खरीद-फरोख्त, नामांतरण, रजिस्ट्री और सरकारी योजनाओं का लाभ लेने में आ रही परेशानियां दूर होंगी। नई जमाबंदी में करीब चार हजार नए इंतकाल दर्ज कर भूमि रिकॉर्ड की त्रुटियों को दुरुस्त किया गया है जिससे 5600 खेवट धारकों समेत हजारों शहरवासियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।
रजिस्ट्री बनने में आ रही थीं बाधाएं
नई जमाबंदी तैयार न होने की वजह से जमीन की रजिस्ट्री बनने में बाधाएं आ रही थीं। लोग आए दिन कार्यालय के चक्कर काटते रहे हैं। चार साल बाद शहर की जमाबंदी की दुरुस्त की गई है। नई जमाबंदी में चार हजार इंतकाल के मामले एवं त्रुटियां दूर की गई हैं। त्रुटियों की वजह से शहरवासियों को जमीन एवं मकान की खरीद-फरोख्त में दिक्कतें आती रही हैं।
जमाबंंदी तैयार करने में समय-समय पर दिक्कतें आती रही। गत जून माह में काम शुरू होते ही जलभराव के चलते पटवारियों की फसल नुकसान का सत्यापन करने में ड्यूटी लग गई थी। इस वजह से करीब डेढ़ माह तक काम बाधित रहा। राजस्व विभाग ने पूरे शहर की जमीन के रिकॉर्ड को 15 जून 2025 से ऑफलाइन कर रखा है। इससे पहले सारी प्रक्रिया ऑनलाइन चल रही थी। जमाबंदी के कार्य के चलते कोई भी जमीन मालिक न तो अपना नाम परिवर्तन करवा सकता था और न ही जमीन का तबादला आदि कर पा रहा था। दाखिला खारिज का काम भी नहीं करवा सकता था। जमाबंदी में त्रुटियों की वजह से आए दिन लोगों को पटवारी व तहसीलदार कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे थे।
वर्ष 2019 में जब से जमीन का रिकार्ड ऑनलाइन किया गया है तब से करीब साढ़े तीन हजार लोगों को अपनी जमीन की जमाबंदी में त्रुटियां ठीक करवानी पड़ी हैं। शुरुआत में ऑनलाइन करते समय 2019 तक का पुराना ऑफलाइन रिकार्ड ही अपलोड कर दिया गया था। उसके बाद के रिकार्ड को दुरुस्त नहीं किया गया। इस वजह से जमाबंदी में हजारों त्रुटियां एवं खामियां रह गई थीं। इन खामियों की वजह से किसी की जमीन का रकबा कम तो किसी का ज्यादा दिखाया गया। लोगों को आए दिन संशोधन यानी बदर लिखवाकर खामियों को दूर करवाना पड़ता था। पटवारी से बदर लिखवाने के लिए फीस भी चुकानी पड़ी है। लोगों को आए दिन पटवारियों के चक्कर भी लगाने पड़े हैं। तहसीलदार के बदर पर हस्ताक्षर होते हैं तब जाकर जमाबंदी का रिकार्ड ठीक हो पाता है।
तहसील कार्यालय में प्रतिदिन करीब 25 जमीन एवं मकानों की रजिस्ट्री होती हैंं। रजिस्ट्री बनवाने से पहले जमीन का पूरा रिकार्ड तैयार करवाना होता है। ऐसे में रकबा कम या ज्यादा मिलने पर उसे ठीक करवाना पड़ता है। काफी संख्या में तो ऐसे मामले सामने आए, जो वास्तविक मालिक होते हुए भी राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में नहीं मिले।
12 ऐसे गांव हैं जिनमें आजादी के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई
लोगों को किसान सम्मान निधि योजना, प्रधानमंत्री आवास योजना, जमीन की रजिस्ट्री बनवाने व खरीद-फरोख्त में बेहद कठिनाइयां आती रही हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत ऋण आदि के लिए जमाबंदी का होना जरूरी है। जमाबंदी में खामियों के चलते विभाग व प्रशासन भी तंग आ चुका था क्योंकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में डेटा फीड करने में दिक्कतें आती रही हैं। जिले में करीब 12 ऐसे गांव हैं जिनमें आजादी के दशक के बाद से ही चकबंदी ही नहीं हुई है। पुराना रिकॉर्ड उर्दू में होने की वजह से नए पटवारी व गिरदावर को भी इसे समझने में दिक्कतें आ रही हैं। किसानों को आए दिन कृषि व राजस्व विभाग कार्यालयों के चक्कर काटने पड़ते हैं।
बॉक्स :
सरकारी योजनाओं का लाभ लेने के लिए उम्मीदवार को दस्तावेज के रूप में मकान या प्लॉट की रजिस्ट्री, इंतकाल व जमाबंदी भी जमा करवानी होती है। नगर परिषद से मकान के ऋण व अन्य सुविधाओं का लाभ लेने के लिए जमाबंदी की फर्द अवश्य जमा करवानी होती है तब जाकर उसे इन सुविधाओं का लाभ मिल पाता है। अब नई जमाबंदी बनने के बाद शहरवासियाें को राहत मिल गई है। अब इसे जल्द ही ऑनलाइन किया जाएगा।
वर्सन :
जल्द ही जमाबंदी को ऑनलाइन कर दिया जाएगा। जमाबंदी का अंतिम प्रारूप तैयार कर चंडीगढ़ भेज दिया गया है। जल्द ही स्वीकृति मिलने पर इसे ऑनलाइन कर दिया जाएगा।- राजेश कुमार, सदर कानूनगो, राजस्व विभाग, दादरी।