चरखी दादरी। किसानों को सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली को अपनाना चाहिए। कारण यह कि सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली से 70 प्रतिशत जल की बचत होती है। जो जल संरक्षण को बढ़ावा देने में कारगर है। सरकार की ओर से सूक्ष्म सिंचाई अपनाने वाले किसानों के लिए विशेष योजनाएं चलाई जा रही हैं। उपायुक्त मुनीश शर्मा ने यह जानकारी दी।
उन्होंने कहा कि किसान आने वाली पीढ़ी को शुद्ध जल रूपी प्राकृतिक संपदा देकर जाना चाहते हैं तो आज ही उन्हें जल संरक्षण को लेकर युद्धस्तर पर कार्य करने चाहिए। ताकि, अन्य लोग भी जल बचाओ अभियान के प्रति जागरूक हो सकें। सरकार की ओर से जल शक्ति अभियान के तहत कैच द रेन, वन इट फॉल, वेयर इट फॉल की थीम पर लोगों को बरसाती पानी के संचयन को लेकर जागरूक किया जा रहा है।
डीसी ने कहा कि सरकार का भी सिंचाई प्रणाली योजना के प्रति यही उद्देश्य है कि कम से कम पानी में अधिक से अधिक उत्पादन किया जाए। इसलिए सरकार किसानों को कृषि से संबंधित सिंचाई के नए आधुनिक साधन मुहैया करवा रही है। सरकार ने कृषि से फसल की पैदावार को दोगुना करने के लिए इस प्रकार की योजनाओं को लागू किया है।
डीसी ने कहा कि टपका सिंचाई प्रणाली से 70 प्रतिशत जल की बचत होती है। इस प्रणाली से पौधों को जरूरत के हिसाब से पानी मिलता है। इस विधि में रासायनिक उर्वरकों को योजना के तहत ड्रिप स्प्रिंकल पर 85 प्रतिशत सब्सिडी का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त योजना के तहत पुराने कुओं का पुनर्जन्म, छत के पानी का एकत्रीकरण, टिब्बे पर सूक्ष्म सिंचाई व्यवस्था और खेती योग्य भूमि को शत-प्रतिशत पानी के प्रबंधन की व्यवस्था की जाएगी। डीसी ने बताया कि योजना के तहत असिंचित क्षेत्र के लिए सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली की व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।