दादरी क्षेत्र के खेत में की गई बाजरे की बिजाई। संवाद
- मोटा अनाज बाजरा की बिजाई के प्रति बढ़ा है किसानों का रुझान, 1.25 लाख एकड़ रकबा में हुई बिजाई
- धान का बिजित रकबा 15 हजार तो कपास का 30 हजार एकड़
संवाद न्यूज एजेंसी
चरखी दादरी। समय पर मानसून की अच्छी बारिश होने से क्षेत्र में 92 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में बिजाई हो चुकी है। जिले का कुल कृषि योग्य रकबा दो लाख 22 हजार 378 हेक्टेयर क्षेत्र है। सर्वाधिक 1.25 लाख एकड़ रकबे में बाजरे की बिजाई हुई है। धान का रकबा करीब 15 हजार और कपास का रकबा 30 हजार एकड़ है। इनके अलावा ग्वार, ज्वार, मूंग, सब्जी, बागवानी व फूलों की खेती भी किसान कर रहे हैं।
खरीफ सीजन की बिजाई का समय बीत चुका है। 92 प्रतिशत क्षेत्र में ही बिजाई हुई है। अगर समय पर बारिश नहीं होती तो यह बिजित रकबा कम होता। इस बार धान की बिजाई का रकबा भी कम नहीं हुआ है। धान की बिजाई तो पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर करती है। जिन किसानों ने धान की रोपाई व बिजाई की है, उनको इस बार सिंचाई का संकट नहीं हुआ।
बारिश भी अच्छी हुई है। नहरों में भी पर्याप्त मात्रा में पानी चल रहा है। इससे धान की फसल बोने वाले किसानों का लागत खर्च कम हुआ है। इस बार नहरी पानी का संकट नहीं है।
कृषि क्षेत्र का देश की अर्थव्यवस्था में 60 प्रतिशत तक योगदान माना जाता है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर जून के अंतिम सप्ताह में बारिश नहीं होती तो इतनी बिजाई नहीं हो पाती। किसान कपास की बिजाई अप्रैल-मई माह में कर चुके थे। कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि इस बार अनाज की खासी पैदावार होने की उम्मीद है। अगर मौसम फसलों के लिए अनुकूल बना रहा तो पकाव ठीक हो सकेगा।
-बागवानी की तरफ बढ़ रहा रुझान
जिले के काफी संख्या में प्रगतिशील किसान बागवानी भी कर रहे हैं। अनेक किसानों ने बाग लगा रखे हैं। इन बाग में सेब, संतरा, नींबू, अमरूद, मौसमी, कीन्नू व अनार आदि के पौधे लगा रखे हैं। ऐसे किसान अच्छी पैदावार ले रहे हैं। गांव ढाणी फोगाट निवासी किसान भल्ले फोगाट तो चंदन की खेती भी कर रहे हैं।
वर्सन
इस बार समय पर बारिश हो जाने की वजह से तकरीबन क्षेत्र में बिजाई हो सकी है। इस समय सभी प्रकार की फसलें अच्छी हैं। अच्छी पैदावार मिलने की उम्मीद है।
-डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी, दादरी