उत्तराखंड़ के सीएम को भेजे गए ज्ञापन की प्रति दिखाते बक्शीराम सैनी व जनसंगठनों के पदाधिकारी।
चरखी दादरी। उत्तराखंड की एक राजनीतिक महिला की ओर से जूना अखाड़ा के नागा संत बाबा आशीष गिरी पर कालनेमि जैसे शब्दों का प्रयोग करते हुए लगाए गए आरोपों पर जिले के जनसंगठनों ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। इस आशय पर संगठनों के प्रतिनिधिमंडल ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा है।
नगर परिषद चेयरमैन बक्शीराम सैनी, हनुमान बगीची के नागा बाबा सदानंद गिरी, शिव शंभू सेवा दल के अध्यक्ष पीतांबर गर्ग भंडारी, श्री बालाजी सेवा संस्थान के विजय शर्मा, भगवान परशुराम अखाड़ा न्यास हरियाणा के अध्यक्ष पंडित रोहतास पुजारी, संत गाडगे सेवादल के अध्यक्ष जगन्नाथ धनेटिया, गोसेवक धर्मचंद अग्रवाल, बाबा सुरेंद्र पुरी समेत नगर पार्षदों ने ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
ज्ञापन में बताया गया है कि बाबा आशीष गिरी मूलतः चरखी दादरी के निवासी हैं। वह महंत ललित गिरी के शिष्य हैं। वर्तमान में देहरादून स्थित रुद्रेश्वर महादेव मंदिर ट्रस्ट तपोवन में सेवा कार्य में नियुक्त हैं। उन्होंने मात्र 5 वर्ष की आयु में भौतिक जीवन त्यागकर संन्यास ले लिया था। 1998 में जूना अखाड़े से नागा संन्यास की दीक्षा ली थी। प्रतिनिधियों ने बताया कि बाबा आशीष गिरी का जीवन पूर्णतः ब्रह्मचारी व संत परंपरा के अनुरूप और बेदाग रहा है। उनके विरुद्ध लगाए गए आरोप तथ्यहीन, अनर्गल और सनातन धर्म को कलंकित करने की एक सुनियोजित राजनीतिक साजिश का हिस्सा हैं।
वहीं, विधायक सुनील सांगवान ने देहरादून के नालापानी रायपुर विधानसभा क्षेत्र के विधायक उमेश शर्मा काऊ से फोन पर बातचीत कर इस मामले पर संज्ञान लेने की अपील की।