चरखी दादरी। जिले की नहरों में वीरवार को 850 क्यूसिक पानी पहुंचा है। इस समय अधिकतर जलघर खाली हैं। जिले को 900 क्यूसिक पानी की जरूरत है। जिले में 60 से ज्यादा जलघर हैं। रबी की फसलों में सिंचाई के लिए भी पानी की इतनी जरूरत नहीं है। जिले का करीब 60 प्रतिशत कृषि क्षेत्र नहरी पानी पर ही निर्भर करता है। इस बार पानी चोरी होने की भी कम ही संभावना है। जनवरी माह की टर्न में नहरी पानी चोरी के 500 मामले पकड़े गए थे। सिंचाई विभाग अधिकारियों ने नहरों की साइटों पर मॉनिटरिंग का कार्य शुरू कर दिया है।
जिले के 168 गांवों में जलघरों के जरिये पेयजल आपूर्ति की जाती है। सभी जलघर नहरों से ही भरे जाते हैं। शहर के अलावा गांव घसोला, मंदोला, कलियाणा, जावा, चांगरोड, दातोली, ढाणी फोगाट, चिड़िया, पांडवान, जावा, पालड़ी, मिसरी, बौंद कलां, अचीना, रानीला, इमलोटा, चरखी, पैंतावास, झोझू कलां, मंदोला, घिकाड़ा, सांवड़, सांजरवास आदि जलघरों में नहरों से ही पानी भरा जाता है।
900 क्यूसिक पानी की है जरूरत
चरखी दादरी के लिए 900 क्यूसिक पानी की जरूरत है। जिले की मेन बधवाना, मैहड़ा, बौंद कलां डिस्ट्रीब्यूटरी व लोहारू कैनाल प्रमुख हैं। जिले में 68 से ज्यादा जोहड़ विभिन्न नहरों से जुड़े हुए हैं। जिले की नहरी पानी की बारी 24 दिन मेंं आती है। पिछली बारी में पर्याप्त मात्रा में पानी मिला था। आने वाले गर्मी सीजन को देखते हुए इस बार सभी जोहड़ व जलघर पानी से लबालब करने की जरूरत है। आने वाले दिनों में पानी की खपत दिन-प्रतिदिन बढ़ने वाली है।
वर्सन :
पर्याप्त मात्रा में पानी मंगवाया गया है। 900 क्यूसिक पानी की मांग की थी,अब तक 850 क्यूसिक पहुंच चुका है। अगले 24 घंटे में पानी की मात्रा पूरी हो जाएगी। जलघरों को प्राथमिकता से भरा जाएगा। 16 दिन के लिए पानी मिला है, तब तक सभी जलघर भर दिए जाएंगे। नहरी पानी की कमी नहीं रहने दी जाएगी।
सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग, दादरी।