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Charkhi Dadri News: नहरों में पहुंचा 800 क्यूसेक पानी, लबालब होंगे खाली पड़े 65 जलघर

Mon, 13 Jul 2026 02:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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लोहारू नहर में बहता पानी। 
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चरखी दादरी। जिले की नहरों में करीब 800 क्यूसेक पानी पहुंचने के बाद जनस्वास्थ्य एवं सिंचाई विभाग को बड़ी राहत मिली है। नहरी पानी मिलने से अब जिले के खाली पड़े जलघरों को भरने का कार्य शुरू हो गया है जिससे शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में चल रहे पेयजल संकट से लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
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हालांकि अभी भी अधिकांश जलघर पूरी क्षमता से नहीं भर पाए हैं और कई गांवों में पेयजल आपूर्ति अनियमित बनी हुई है। ऐसे में लोगों ने विभाग से नियमित और प्रतिदिन पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने की मांग उठाई है।

दादरी जिले के 168 गांवों में पेयजल आपूर्ति जलघरों के माध्यम से की जाती है। जिले में 65 से अधिक जलघर संचालित हैं जिन्हें मुख्य रूप से नहरों के पानी से भरा जाता है। पिछले कुछ दिनों से शहर में एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति की जा रही थी जबकि ग्रामीण क्षेत्रों में कई जलघर खाली होने के कारण लोगों को पानी की भारी किल्लत का सामना करना पड़ रहा था। अब नहरी पानी आने से जलघरों को भरने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है।
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जिले में बधवाना, मैहड़ा, बौंद कलां डिस्ट्रीब्यूटरी और लोहारू कैनाल प्रमुख नहरें हैं जिनसे जलापूर्ति की जाती है। इसके अलावा जिले के 68 से अधिक जोहड़ भी इन्हीं नहरों से भरे जाते हैं। जिले में नहरी पानी की बारी लगभग 24 दिन बाद आती है। अधिकारियों का कहना है कि गर्मी के मौसम और बढ़ती पानी की मांग को देखते हुए इस बार सभी जलघरों और जोहड़ों को पूरी क्षमता तक भरने का प्रयास किया जाएगा ताकि आने वाले दिनों में पेयजल संकट उत्पन्न न हो।
इन गांवों में पहुंचाया जा रहा पानी
जिले के प्रमुख जलघरों में शहर के अलावा घसोला, मंदोला, कलियाणा, जावा, चांगरोड़, दातौली, ढाणी फौगाट, चिड़िया, पांडवान, पालड़ी, मिसरी, बौंद कलां, अचीना, रानीला, इमलोटा, चरखी, पैंतावास, झोझू कलां, घिकाड़ा, सांवड़ और सांजरवास सहित अन्य गांवों के जलघर शामिल हैं। इन सभी जलघरों में नहरों के माध्यम से पानी पहुंचाया जा रहा है।
पेयजल किल्लत बनी परेशानी
ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की आपूर्ति की कोई निश्चित समय-सारिणी नहीं होने से लोगों की परेशानी बढ़ रही है। गांव की महिलाओं धर्मकौर, कविता और कृष्णा ने बताया कि कई बार रात दो या तीन बजे पानी छोड़ा जाता है जिससे लोगों को जागकर पानी भरना पड़ता है और काफी पानी भी व्यर्थ बह जाता है। उन्होंने जनस्वास्थ्य विभाग से गांवों में प्रतिदिन और निर्धारित समय पर पेयजल आपूर्ति करने की मांग की है।
शहर में एक दिन छोड़कर हो रही सप्लाई
शहर में भी पिछले करीब दस वर्षों से एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था लागू है। नागरिकों का कहना है कि बढ़ती आबादी के बीच यह व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। उनका कहना है कि प्रतिदिन पानी मिलने पर ही प्रत्येक व्यक्ति को निर्धारित 135 लीटर प्रतिदिन पेयजल उपलब्ध कराया जा सकता है। कई बार बिजली कटौती के दौरान जलघरों से सप्लाई प्रभावित होने के कारण भी पानी की किल्लत बढ़ जाती है।
मानसून ने दी राहत, खपत घटी
इस बीच मानसून की बारिश ने भी कुछ राहत दी है। जिले में अब तक 59 एमएम वर्षा दर्ज की जा चुकी है जिससे पेयजल की खपत में करीब 10 प्रतिशत की कमी आई है। हालांकि सामान्य मानसून के लिए जिले में करीब 500 एमएम वर्षा आवश्यक मानी जाती है। पिछले वर्ष मानसून सीजन में 441 एमएम बारिश रिकॉर्ड की गई थी। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार इस बार सिंचाई के लिए पानी की मांग अपेक्षाकृत कम रहने की संभावना है और मुख्य रूप से धान की फसल के लिए ही अतिरिक्त पानी की जरूरत पड़ेगी। ऐसे में नहरों में आया 800 क्यूसिक पानी पेयजल आपूर्ति के साथ-साथ सिंचाई व्यवस्था के लिए भी राहत लेकर आया है।

जलघरों को प्राथमिकता से भरा जाएगा। सभी जलघर भर दिए जाएंगे। नहरी पानी की कमी नहीं रहने दी जाएगी। अगर बारिश इसी प्रकार होती रही तो नहरों में मानसून सीजन के दौरान लगातार पानी छोड़ा जा सकता है।
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- सतेंद्र कुमार, एक्सईएन, सिंचाई विभाग।
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