चरखी दादरी। प्रदेश सरकार की ओर से चलाई जा रही अमृत सरोवर योजना के तहत जिला के 59 तालाबों के जीर्णोंद्धार के लिए मानसूनी सीजन के बाद काम शुरू किया जाएगा। सरकार की योजना है कि इन तालाबों की मिट्टी निकालकर चारों ओर बांध बनाकर पौधे लगाकर हरियाली विकसित की जाए। इस समय अधिकांश जोहड़ों में पानी भरा है। जोहड़ों एवं तालाबों के सुंदरीकरण के लिए इस समय पौधरोपण किया जा रहा है। इसके लिए ग्राम पंचायतों की ओर से विभाग को लिखित में मांग भी भेजी जा चुकी है।
हालांकि पंचायत विभाग की ओर से मनरेगा के तहत जोहड़ों के सुंदरीकरण के लिए काम शुरू किया जा चुका है। लेकिन इस समय बारिश के चलते यह काम अटका हुआ है। जोहड़ एवं तालाब हरियाणवी संस्कृति की धरोहर रहे हैं। लेकिन ग्राम पंचायतों व जिम्मेदारों की अनदेखी के चलते अधिकांश जोहड़ भी अपना अस्तित्व खोने लगे हैं। पुराने समय में जोहड़ों में केवल बारिश का ही पानी भरता था। जोहड़ों के पानी से भूमिगत जलस्तर भी बना रहता था तथा शुद्धता भी बनी रहती थी। लेकिन अब अधिकांश जोहड़ों में गांवों का गंदा पानी डाला जा रहा है जिससे जल प्रदूषण के साथ भूमि प्रदूषण भी बढ़ रहा है। पहले लोग तालाबों में ही पशुओं को पानी पिलाते थे लेकिन तालाबों के पानी की गुणवत्ता खराब होने पर पशुपालक नल या नलकूप आदि के पानी का ही पशुओं के लिए इस्तेमाल करते हैं। इन जोहड़ के चारों ओर हरियाली भी होती थी लेकिन पिछले दो दशकों से यह हरियाली भी खत्म हो गई है।
जोहड़ की गाद निकालकर बनवाएंगे बांध
अब सरकार गांवों के लिए नई योजना पर काम कर रही है। इसके तहत जिस भी गांव में जोहड़ एवं तालाब की सफाई होगी उसकी गाद निकालकर चारों ओर बांध बनाया जाएगा। आसपास के क्षेत्र को हरा-भरा बनाया जाएगा। जिला में 59 गांवों में काम मनरेगा स्कीम के तहत पूरा करवाया जाना है। यह काम पिछले दिनों शुरू हो चुका था लेकिन बारिश की वजह से प्रभावित हो रहा है। यह 59 गांव जिला के सभी ब्लॉक से लिए गए हैं। जिला में पेड़ों की संख्या वैसे ही कम आंकी जा रही है। इसे देखते हुए लाखों की संख्या में पौधे लगाए जाने की योजना है। पेड़ों की संख्या अधिक होने पर भी ज्यादा मात्रा में बारिश का होना संभव है।
मानसून सीजन के उपरांत अमृत सरोवर योजना के तहत शामिल किए गए 59 जोहड़ों की सफाई कराई जाएगी। जिन जोहड़ को मॉडल पोंड का दर्जा दिया गया है उसका अलग से सुंदरीकरण करने की योजना पर काम किया जाएगा। ग्रामीण जोहड़ों में दूषित पानी न डालें। अनेक गांवों के जोहड़ प्राचीन धरोहर हैं।
- राजबीर सिंह, जिला मनरेगा प्रभारी