चरखी दादरी। प्रदेश सरकार की अनदेखी के चलते जिले के पांच राजीव गांधी खेल स्टेडियम बदहाली की कगार पर पहुंच चुके हैं। इन स्टेडियमों की पिछले सात साल से मरम्मत तक नहीं हो पाई है। गत वर्ष नवंबर माह में जिला खेल विभाग ने पांच राजीव गांधी खेल स्टेडियमों की मरम्मत एवं रख-रखाव के लिए 1.33 करोड़ रुपये के एस्टीमेट तैयार कर मुख्यालय भेजा था। इस बजट का फिलहाल जिला खेल विभाग को इंतजार है।
बता दें कि जिले की खेल प्रतिभाएं लगातार विदेशों में पदक जीतकर जिले के साथ प्रदेश व देश का नाम रोशन कर रही हैं। लेकिन खेल विभाग की अनदेखी के चलते स्टेडियमों की बदहाली जिले के करीब पांच हजार खिलाड़ियों के अभ्यास में आड़े आ रही है। इन स्टेडियमों की मरम्मत भी जिला बनने से पूर्व हुई थी। अब दस माह बाद भी एस्टिमेट के हिसाब से बजट उपलब्ध नहीं हो पाया है जबकि लंबे समय से खिलाड़ी खेल स्टेडियमों में मूलभूत सुविधाएं मुहैया होने का इंतजार कर रहे हैं। खेल स्टेडियमों में मूलभूत सुविधाओं के अभाव में खिलाड़ियों की नई पौध भी मुरझाने लगी है।
वर्तमान में अधिकांश राजीव गांधी खेल स्टेडियम के खिड़की-जंगले, जालियां, चहारदीवारी, शौचालय, बिजली, पानी, साफ-सफाई, खेल सामान आदि मूलभूत सुविधाएं ही नदारद हैं। वहीं, जिला खेल विभाग को इनकी दशा सुधारने के लिए अभी तक बजट का इंतजार है। नवंबर माह में जिला खेल विभाग की ओर से इन बदहाल स्टेडियमों की सुध लेकर एस्टिमेट तैयार कर मुख्यालय भेजे गए थे। दस माह का समय बीतने के बावजूद भी इन्हें स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस समय स्टेडियमों में उगी झाड़ियां, उबड़-खाबड़ ट्रैक के कारण यहां खिलाड़ियों को मुश्किलें आ रही हैं।
जानिये...किस स्टेडियम पर कितनी राशि होनी है खर्च
स्टेडियम - राशि
राजीव गांधी खेल परिसर चांदवास- 27.33 लाख
राजीव गांधी खेल परिसर अचीना- 23.54 लाख
राजीव गांधी खेल परिसर झोझूकलां- 29.13 लाख
राजीव गांधी खेल परिसर छपार- 26.70 लाख
राजीव गांधी खेल परिसर मकड़ाना- 26.54 लाख
- जिले में ये है खिलाड़ियों की स्थिति
खेल के क्षेत्र में जिले के खिलाड़ी विश्व पटल पर जिले का नाम रोशन कर चुके हैं लेकिन प्रदेश का खेल विभाग एवं सरकार खिलाड़ियों को खेल सुविधाएं तक मुहैया कराने में विफल रही है। इस समय जिले में करीब 30 अंतरराष्ट्रीय, 50 राष्ट्रीय, 30 राज्यस्तरीय व 4 हजार जिलास्तरीय खिलाड़ी हैं। ओलंपिक से लेकर प्रदेश स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं तक जिले की भागीदारी अवश्य रहती है। लेकिन खेल स्टेडियमों में सुविधाओं के नाम पर जिले के खिलाड़ियों को निराशा ही हाथ लगती है। ग्रामीण क्षेत्रों की खेल प्रतिभाओं को मूलभूत सुविधाओं के लिए या तो निजी खेल एकेडमियों का सहारा लेना पड़ता है या फिर अन्य जिलों में प्रशिक्षण लेने को मजबूर होना पड़ रहा है।
जिला खेल विभाग की ओर से नवंबर 2022 को निदेशक खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग को छह स्टेडियमों की मरम्मत एवं मूलभूत सुविधाओं को लेकर 1.33 करोड़ रुपये का एस्टिमेट बनाकर भेजा था। इसी माह खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग की प्रदेश स्तरीय बैठक होनी है। उम्मीद है कि जल्द ही स्वीकृति मिलेगी। बजट मिलते ही स्टेडियमों में मरम्मत, साफ-सफाई, चहादीवारी, लेवलिंग, टूटे खिड़की जंगलों की मरम्मत, पानी सहित अन्य प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएंगी।
-बस्तीराम, जिला खेल अधिकारी, चरखी दादरी