बाढड़ा। ग्रामीणों को स्वच्छ और हरा भरा वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से करीब एक वर्ष पहले पंचायत विभाग की ओर से गांव बाढड़ा में विकसित किया गया स्वर्ण जयंती पार्क अब देखरेख के अभाव में बदहाली का शिकार हो गया है।
48 लाख रुपये की लागत से तैयार इस पार्क में जगह-जगह घास, झाड़ियां और खरपतवार उग आई हैं। वॉकिंग ट्रैक भी घास से ढक गया है जबकि पार्क की अन्य सुविधाएं भी रखरखाव के अभाव में जर्जर होती जा रही हैं। पार्क की बिगड़ती स्थिति को लेकर ग्रामीणों में रोष है।
6 कनाल भूमि पर विकसित किया गया पार्क
स्वर्ण जयंती पार्क का निर्माण 6 कनाल भूमि पर किया गया है। पार्क में वॉकिंग ट्रैक, शौचालय, एक कमरा, हरी घास वाला मैदान तथा प्रकाश व्यवस्था विकसित की गई थी। वर्तमान में मैदान और ट्रैक पर खरपतवार फैल चुकी है जबकि कई स्थानों पर बिजली के तार लटक रहे हैं।
48 लाख रुपये की लागत से हुआ निर्माण
पंचायत विभाग ने करीब एक वर्ष पहले स्वर्ण जयंती पार्क का निर्माण लगभग 48 लाख रुपये की लागत से कराया था। ग्रामीणों का कहना है कि इतनी बड़ी राशि खर्च होने के बावजूद नियमित रखरखाव नहीं होने से पार्क की हालत लगातार बिगड़ रही है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र सुधार कार्य शुरू कराने की मांग की है।
लाखों की राशि हुई बर्बाद
ग्रामीण बलवान, होशियार सिंह, भरत सिंह, बलजीत, विद्यानंद, मीर सिंह, विवेक और अजय ने बताया कि पार्क के निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए लेकिन नियमित रखरखाव नहीं होने से यह सार्वजनिक सुविधा बदहाल होती जा रही है। उनका कहना है कि समय-समय पर घास की कटाई, सफाई और आवश्यक मरम्मत कराई जाए तो पार्क फिर से पहले की तरह आकर्षक और उपयोगी बन सकता है।
पार्क में लटक रहे तार
ग्रामीणों ने बताया कि पार्क में कई स्थानों पर बिजली के नंगे तार लटक रहे हैं जिससे हादसे की आशंका बनी हुई है। मैदान और वॉकिंग ट्रैक पर फैली खरपतवार के कारण बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उनका कहना है कि यदि समय रहते सुधार नहीं किया गया तो पार्क की स्थिति और अधिक खराब हो जाएगी।
व्यवस्था दुरुस्त करवाने की मांग
ग्रामीणों ने प्रशासन, पंचायत विभाग और ग्राम पंचायत से पार्क की नियमित साफ-सफाई, घास एवं झाड़ियों की कटाई, बिजली व्यवस्था दुरुस्त कराने और अन्य आवश्यक मरम्मत कार्य शीघ्र कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सार्वजनिक धन से तैयार इस पार्क का संरक्षण किया जाना जरूरी है ताकि क्षेत्र के लोग इसका पूरा लाभ उठा सकें।