फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Charkhi Dadri News: बिजाई का समय समाप्ति की ओर, 45 प्रतिशत कृषि क्षेत्र बारिश से अछूता

Sun, 21 Jul 2024 05:03 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
विज्ञापन
विज्ञापन
चरखी दादरी। खरीफ सीजन की बिजाई का समय समाप्ति की ओर है। इसके बावजूद जिले के 55 प्रतिशत कृषि क्षेत्र में ही बिजाई हो सकी है। अगर हफ्तेभर में बारिश नहीं हुई तो बोया गया बीज और छोटे पौधे भी नष्ट हो सकते हैं। इससे किसान चिंतित हैं। इसके मद्देनजर कृषि विभाग ने सभी बीएओ और एडीओ से बिजाई संबंधी पूरा विवरण तैयार करने के लिए कहा है।
विज्ञापन

देश की अर्थव्यवस्था में कृषि क्षेत्र का योगदान 60 प्रतिशत तक माना जाता है। जिले का कुल कृषि योग्य क्षेत्र 1.21 लाख हेक्टेयर है, जिसमें से करीब 65,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बिजाई हो सकी है। अब बिजाई का पछेता समय चल रहा है। मानसून की बारिश न होने से फसलों का बिजाई रकबा कम हो गया है। अकेले कपास का रकबा 14,000 हेक्टेयर घट गया है। कपास की फसल में जून में तापमान ज्यादा बने रहने की वजह से पहले ही काफी नुकसान हो चुका है। पिछले साल बाजरा की बिजाई का रकबा 50,000 हेक्टेयर से ज्यादा था जबकि इस बार कुल 18,000 हेक्टेयर क्षेत्र में ही बुवाई हो सकी है।



धान की बिजाई तो पूरी तरह से बारिश पर ही निर्भर है। इस कारण धान की बिजाई भी कम हुई है। जिन किसानों ने खुद के सिंचाई संसाधनों से धान की रोपाई और बिजाई की है। इससे खेती की लागत बढ़ गई है। नहरी पानी का भी संकट बना है। बारिश और नमी के अभाव में बीजों का अंकुरण कम हुआ और उगी फसल भी सूखने की स्थिति में पहुंच गई है।
विज्ञापन


- सरकार की सूखाग्रस्त घोषित की अंतिम तिथि है 31 जुलाई



सरकार 31 जुलाई तक बारिश न होने पर क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करती है। किसान नेता रामकुमार कादयान का कहना है कि सरकार को सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित कर किसानों को मुआवजा देना चाहिए। क्योंकि बिजाई का सामान्य समय बीत चुका है। पछेती बिजाई से न तो उतनी पैदावार मिल सकती है और न ही रबी की अगली फसलों की बिजाई समय पर हो सकेगी। रामकुमार कादयान का कहना है कि किसान पर दोहरी मार पड़ रही है। इस कारण कुछ दिन पहले ही किसान संगठन डीसी को ज्ञापन देकर सूखाग्रस्त क्षेत्र घोषित करने की मांग कर चुके हैं।






बारिश न होने का मुख्य कारण जलवायु परिवर्तन है। कार्बन उत्सर्जन से नुकसानदायक कण वायुमंडल में घुल रहे हैं। धरती का तापमान बढ़ रहा है। पेड़ों की संख्या कम होती जा रही है। अरब सागर और बंगाल की खाड़ी से नमीयुक्त हवाएं चलती हैं। वायुमंडल की निचली एवं जमीनी सतह से गर्म हवाएं ऊपर उठती है तो बारिश खंडित हो जाती है। - डॉ. चंद्रमोहन, मौसम विशेषज्ञ।

जिले के करीब 55 प्रतिशत क्षेत्र में ही मुश्किल से बिजाई हो सकी है। करीब 18,000 हेक्टेयर क्षेत्र में बाजरा बोया जा सका है। कपास का रकबा भी 14,000 हेक्टेयर घट गया है। अगर एक सप्ताह तक बारिश नहीं हुई तो बोया गया बाजरा भी सूख जाएगा। इसलिए बीएओ और एडीओ सोमवार से खेती का पूरा विवरण जुटाएंगे। - डॉ. जितेंद्र सिहाग, कृषि तकनीकी अधिकारी, चरखी दादरी।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें