चरखी दादरी। जिला में 7000 बैग यूरिया व 1800 डीएपी खाद के पहुंचे हैं। जुलाई व अगस्त माह में यूरिया खाद की खपत ज्यादा होती है। इस बार यूरिया प्राइवेट विक्रेताओं के पास भी भेजा गया है।
इस समय खरीफ सीजन की फसलों की बिजाई का काम चल रहा है। किसान बाजरा व ग्वार की बिजाई कर रहे हैं। कपास की बिजाई तो मई माह में ही हो चुकी थी। आजकल किसान बाजरा की बिजाई करते समय भी डीएपी का इस्तेमाल करते हैं जबकि पहले नहीं करते थे। ऐसे में इसकी खपत ज्यादा हो रही है। जिला में अब तक एक लाख 10 हजार एकड़ में बाजरा की बिजाई हो चुकी है। बाजरा की बिजाई का समय 15 जुलाई तक है।
किसान यूरिया खाद का ज्वार, बाजरा व अन्य फसलों में छिड़काव करते हैं जबकि डीएपी बिजाई के दौरान खेत में डाला जाता है। बाजरा या ज्वार का पौधा एक से डेढ़ फीट लंबा होने पर यूरिया का छिड़काव किया जा सकता है। इससे पौधे का विकास एवं बढ़ोतरी ठीक प्रकार से होती है।
वीरवार को जिला में 350 एमटी यानी 7000 बैग यूरिया व 1800 बैग डीएपी खाद के पहुंचे हैं। नगर में पुरानी अनाज मंडी स्थित जमीदारा सोसायटी कार्यालय में 2200 बैग यूरिया के पहुंचे हैं। इस बार यूरिया खाद प्राइवेट विक्रेताओं को भी बिक्री के लिए भेजा गया है। नगर मेंं करीब 10 प्राइवेट विक्रेता हैं जो खाद व बीज की बिक्री करते हैं।
इस संबंध में कृषि विभाग के एसडीओ कृष्ण कुमार ने बताया कि खाद की कमी नहीं होने दी जाएगी। किसान खाद का कम से कम इस्तेमाल करें। जुलाई माह में पर्याप्त मात्रा में खाद मंगवाई जाएगी। किसान फसलों में जैविक एवं गोबर की देशी खाद का ज्यादा इस्तेमाल करें।