अंबाला बस स्टैंड में रोडवेज कर्मचारी की हत्या के विरोध में दादरी डिपो में बुधवार को चक्का जाम रहा। रोडवेज बसों के 300 फेरे न लगाने से 15 हजार यात्रियों को परेशानी झेलनी पड़ी जबकि विभाग को करीब 10 लाख के राजस्व का फटका लगा। रोडवेज बसों के पहिये थमने के चलते समिति की बसों और प्राइवेट वाहन चालकों ने खूब चांदी कूटी।
रोडवेज कर्मचारी की हत्या के बाद हत्यारोपियों की गिरफ्तारी न होने से नाराज रोडवेज कर्मचारियों ने मंगलवार रात 12 बजे से ही चक्का जाम कर दिया था। बुधवार सुबह दादरी डिपो से एक भी रोडवेज बस का संचालन नहीं हो पाया और सभी यूनियन ने एक मंच पर आकर बस स्टैंड परिसर में धरना दिया। देर शाम तक बसों का चक्का जाम रहा।
बता दें कि हर रोज दादरी डिपो से 116 बसों का संचालन होता है। ये बसें विभिन्न रूटों पर 300 से अधिक फेरे लगाती हैं। इनके जरिये प्रतिदिन करीब 15 हजार से अधिक यात्री अपने गंतव्य तक पहुंचते हैं। चक्का जाम के चलते बुधवार को बसों का संचालन नहीं हो पाया और यात्री अपने गंतव्य पर पहुंचने के लिए परेशान नजर आए। वहीं, कर्मचारियों के धरना के मद्देनजर बस स्टैंड परिसर में पुलिस तैनात रही।
ट्रेनों में 5 की जगह 10 हजार यात्रियों ने किया सफर
रोडवेज बसों का चक्का जाम होने के चलते यात्रियों को ट्रेनों में सफर करना पड़ा। एक सामान्य दिन में दादरी रेलवे स्टेशन से पांच हजार यात्री सफर करते थे जबकि बुधवार को इनकी संख्या दस हजार पहुंच गई। सामान्य दिनों के मुकाबले प्लेटफार्म पर बुधवार को यात्रियों की दोगुनी भीड़ रही।
ये है चरखी दादरी रोडवेज डिपो का बेडा
दादरी रोडवेज डिपो के बेडे में फिलहाल 116 बसें शामिल हैं। वहीं, 25 बसें जहां सोसायटी की हैं जो परमिट के आधार पर विभिन्न रूटों पर चलाई जाती हैं। डिपो से 15 बसें किलोमीटर स्कीम के तहत चलाई जा रही हैं। बुधवार को हुई हड़ताल के दौरान केवल सोसायटी की बसें ही चल पाई।
रेलवे विभाग और सवारी वाहन चालकों की बढ़ी आमदनी
सामान्य दिन की बात करें तो रेलवे विभाग को पांच हजार यात्रियों से करीब एक लाख रुपये का राजस्व प्राप्त होता है। बुधवार को ये आंकड़ा दो लाख पार पहुंच गया। इतना ही नहीं सोसायटी की बसों और अन्य सवारी वाहनों ने लगातार कई चक्कर लगाए और सामान्य दिनों के मुकाबले उनकी तीन से चार गुना कमाई हुई।
ये हैं रोडवेज यूनियन की मांगें
हरियाणा कर्मचारी महासंघ के जिला प्रधान कृष्ण कुमार ने बताया कि हड़ताल पर बैठे सभी कर्मचारियों की मांग है कि सरकार हत्यारोपियों को जल्द गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेजे। मृतक कर्मचारी को शहीद का दर्जा, पीड़ित परिवार को 50 लाख रुपये की सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी मिले।