दो करोड़ खर्च कर 13 किलोमीटर लंबी नई सीवर लाइन डालने के बाद भी व्यवस्था पटरी पर नहीं लौटी है। शहर की 12 कॉलोनियों में अभी सीवर व्यवस्था चरमराई हुई है। कई भागों में सीवर की मुख्य लाइनें बैक मार रही हैं। सीवर लाइनों की नियमित सफाई न होने के कारण यह समस्या उत्पन्न हो रही है, क्योंकि ज्यादातर फील्ड वर्क जेई द्वारा ही किया जाता है। जिले में जेई के छह पद खाली है। इसके चलते सीवर लाइनों की नियमित मॉनिटरिंग भी नहीं हो पा रही है।
सरकार की ओर से करीब दो साल पहले शहर की कॉलोनियों में नई सीवर लाइन बिछाए जाने के लिए दो करोड़ से ज्यादा का बजट मंजूर हुआ। जुलाई 2019 में जनस्वास्थ्य विभाग ने सीवर लाइन बिछाए जाने का काम किया था। शहर में आठ इंची नई सीवर लाइनें बिछाई गई थी और काफी लाइन को मुख्य लाइन से जोड़ा गया, लेकिन मुख्य लाइन से पूरा उठान नहीं होने के कारण ब्लाकेज की समस्या बनी हुई है। शहर में सीवर की कुल 135 किलोमीटर लंबी लाइन हैं। जो किसी न किसी प्वाइंट पर ब्लॉकेज हैं। विभाग में कर्मचारियों की कमी की वजह से सीवर लाइनों की देखरेख का काम समय पर नहीं हो पाता है। लंबा समय बीतने पर सीवर लाइन रुक जाती हैं। ज्यादातर फील्ड वर्क जेई की ओर से ही किया जाता है और साइटों का जायजा लिया जाता है लेकिन जिला में इस समय जेई के छह पद खाली हैं। वहीं विभाग पहले ही पुरानी लाइनों की ब्लॉकेज खोलने में उलझा हुआ है। जैटिंग मशीन के जरिए ब्लॉकेज खोली जा रही हैं।
इन क्षेत्रों में बनी है सीवर समस्या
इस समय ढाणी ओवरब्रिज, ढाणी रेलवे फाटक के समीप, रासीवासिया धर्मशाला रोड, गांधी नगर,चरखी दरवाजा, तिकोना पार्क सहित कई भागों में सीवर लाइनें रूकी हुई हैं। सीवर ओवरफ्लो होने पर पानी सड़क और गलियों में एकत्रित हो जाता है। सीवर लाइनों में पशुओं का गोबर व प्लास्टिक की थैलियां गिरने से ज्यादा दिक्कत बन हुई है। यही हाल सीवर नालों का है। सीवर लाइन रुकने से पानी एसटीपी तक नहीं पहुंच और लाइनें बैक मारने लगती हैं।
पार्षद बोले: नए सिरे से योजना तैयार करे विभाग
-- नगर पार्षद बख्शी सैनी, पार्षद रचना देवी और पार्षद महेश गुप्ता का कहना है कि शहर के सीवर सिस्टम को नए सिरे से दुरुस्त करने की जरूरत है। इसके लिए अलग से मास्टर प्लान बनाने की जरूरत है तब जाकर इसका स्थायी समाधान संभव है।
सीवर व्यवस्था में सुधार के लिए हम प्रयासरत्त हैं। सीवर लाइनों की नियमित सफाई करवाई जा रही है। ड्रेन नंबर आठ प्रोजेक्ट पूरा होने के बाद सीवर समस्याओं से लोगों को राहत मिलेगी।
शशिकांत, एक्सईएन, जनस्वास्थ्य विभाग