चरखी दादरी। आमजन के साथ सरकारी विभाग भी प्रॉपर्टी टैक्स की अदायगी के प्रति संजीदा नहीं हैं। करीब 12 विभागों पर नगर परिषद का 11.39 करोड़ का प्रॉपर्टी टैक्स बकाया है। कई बार नोटिस भेजने के बाद भी विभागों ने अदायगी में रुचि नहीं ली है। विभागों के प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान न करने का असर सीधे तौर पर शहरी विकास पर पड़ रहा है।
अतिरिक्त उपायुक्त एवं नगर आयुक्त डॉ. जयेंद्र छिल्लर का कहना है प्रॉपर्टी टैक्स न भरने वाले विभागों पर अब नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। शहर स्थित 12 विभागों के कार्यालयों का सालों से प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान नहीं किया गया है। नगर परिषद अधिकारियों के मुताबिक विभागों की फिलहाल 11,39,69,554 रुपये की राशि बकाया है। सबसे अधिक 31 प्रॉपर्टी आईडी सिंचाई विभाग की बनी हुई है। सिंचाई विभाग पर टैक्स के रूप में 1.08 करोड़ रुपये बकाया है।
कई बार विभागाध्यक्षों को बकाया प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान करने की अपील की गई, जबकि इसके बाद नोटिस भी जारी हुए। हालांकि, इसके बाद भी विभागों ने अपना रवैया जस का तस रखा और अब तक लंबित राशि नगर परिषद के खजाने में जमा नहीं करवाई है। सरकारी विभागों की ओर से लगातार नोटिसों की अनदेखी के चलते अब नगर परिषद अधिकारी अब आगामी कार्रवाई करने के मूड में नजर आ रहे हैं।
प्रॉपर्टी टैक्स की नगर परिषद की आमदनी का अहम स्रोत
बता दें कि शहर में विकास कार्याें का खाका खींचने की जिम्मेदारी नगर परिषद की है। वहीं, नगर परिषद के लिए आय का सबसे प्रमुख स्रोत प्रॉपर्टी टैक्स ही है। लोगों और विभागों के समय पर टैक्स अदायगी न करने का असर सीधे तौर पर शहरी विकास पर पड़ रहा है। दूसरी ओर खजाना खाली होने की सूरत में नगर परिषद को विकास कार्याें के लिए सरकार की ग्रांट पर निर्भर रहना पड़ता है।
किस का कितना प्रॉपर्टी टैक्स है बकाया
विभाग - कुल प्रॉपर्टी आईडी - बकाया राशि
सिंचाई विभाग - 31 - 10,863,422 रुपये
जनस्वास्थ्य विभाग - 13 - 19,760,392 रुपये
पुलिस विभाग कार्यालय - 15 - 12,756,631 रुपये
हरियाणा राज्य कृषि विपणन बोर्ड - 10 - 6,980,617 रुपये
पंचायत विभाग - 02 - 104,860 रुपये
एसडीएम पुराना आवास - 01 - 33,72,792 रुपये
वन विभाग - 01 - 59,67,156 रुपये
प्रॉपर्टी टैक्स का भुगतान न करने वाले विभागों को कई बार नोटिस जारी कर अवगत करवाया गया है, लेकिन कोई भी विभाग टैक्स नहीं भर रहा है। अब बकाया राशि की रिकवरी के लिए जल्द ही इन विभागों के खिलाफ नियमानुसार आगामी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। - डॉ. जयेंद्र सिंह छिल्लर, एडीसी एवं नगर आयुक्त।