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Charkhi Dadri News: जिले की नहरों के लिए मिला 1000 क्यूसिक पानी, सिंचाई व पेयजल समस्या से राहत मिलने की उम्मीद

Mon, 03 Aug 2026 12:43 AM IST
अमर उजाला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चरखी दादरी
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शहर से गुजरने वाली लोहारू कैनाल।  - फोटो : 1
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चरखी दादरी। जिले में बारिश न होने और पिछली बारी में नहरों में पर्याप्त पानी न मिलने से पेयजल और सिंचाई का संकट लगातार गहराता जा रहा है। शहर से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक अधिकांश जलघर खाली होने की स्थिति में हैं जबकि खरीफ फसलें बढ़वार के अंतिम चरण में पहुंच चुकी हैं।
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ऐसे में मौजूदा बारी में जिले को 1000 क्यूसिक नहरी पानी मिलने से किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत की उम्मीद जगी है। यदि पानी का सही ढंग से वितरण हुआ तो खेतों के साथ-साथ जलघरों को भी भरने में मदद मिलेगी।
खाली जलघरों ने बढ़ाई पेयजल की चिंता
बारिश न होने से जिले में पेयजल की मांग लगातार बढ़ रही है। सामान्य वर्षों में मानसून के दौरान तापमान कम होने से पानी की खपत घट जाती है लेकिन इस बार लगातार उमस और गर्मी के चलते लोगों को अधिक पानी की आवश्यकता पड़ रही है।
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शहर के दोनों प्रमुख जलघरों में पर्याप्त पानी नहीं है जबकि कई ग्रामीण जलघर भी खाली पड़े हैं। ऐसे में नहरी पानी मिलने के बाद जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है।
धान की फसलों को पानी की जरूरत
इस समय जिले में बाजरा, कपास, धान, ग्वार सहित अन्य खरीफ फसलें अंतिम बढ़वार के दौर में हैं। इनमें धान की फसल को सबसे अधिक पानी चाहिए। नहरों में पानी की कमी के कारण किसान मजबूरी में बोरिंग और ट्यूबवेल से सिंचाई कर रहे हैं। लगातार मोटर चलाने से बिजली खर्च बढ़ रहा है और भूजल का दोहन भी तेजी से हो रहा है।
पिछले टर्न में नहीं पहुंचा था पानी
पिछले टर्न में जिले को अपेक्षाकृत काफी कम नहरी पानी मिला था। इसके चलते नहरों और माइनरों के अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पाया। कई गांवों के किसानों ने सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध कराने की मांग विभाग के समक्ष रखी थी।
अब 1000 क्यूसिक पानी मिलने से उम्मीद है कि नहरों के साथ-साथ जलघर भी भरे जा सकेंगे और किसानों को समय पर सिंचाई का लाभ मिलेगा।
भूजल बचाने में भी मिलेगी राहत
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि आने वाले दिनों में भी अच्छी बारिश नहीं हुई तो नहरी पानी की आवश्यकता और बढ़ जाएगी। जिले में पहले से ही भूजल स्तर लगातार गिर रहा है। ऐसे में पर्याप्त नहरी पानी मिलने से ट्यूबवेलों पर निर्भरता कम होगी और भूमिगत जल के अत्यधिक दोहन पर भी रोक लगाने में मदद मिलेगी।
पानी चोरी रोकने और निगरानी की मांग
किसानों का कहना है कि इस बार पर्याप्त मात्रा में नहरी पानी मिलने की उम्मीद है, लेकिन इसके साथ पानी चोरी की आशंका भी बढ़ गई है। उन्होंने विभाग से मांग की है कि नहरों और माइनरों की नियमित निगरानी की जाए ताकि अंतिम छोर तक भी बराबर पानी पहुंच सके और किसी किसान के साथ भेदभाव न हो।
इन जलघरों में तत्काल पानी भरने की जरूरत
वर्तमान में शहर के दोनों जलघरों के अलावा सांजरवास, ढाणी फोगाट, सांवड़, मिसरी, कपूरी, मंदोला, चरखी, बिरही कलां, घिकाड़ा, पैंतावास, अचीना, रानीला और बौंद कलां सहित कई गांवों के जलघरों में पानी की कमी बनी हुई है।
वहीं ग्रामीणों ने बधवाना डिस्ट्रीब्यूटरी में भी जल्द पानी छोड़ने की मांग उठाई है, ताकि इसके अधीन आने वाले करीब 15 गांवों के जलघरों में भी समय पर पेयजल उपलब्ध कराया जा सके। अब लोगों की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि विभाग 1000 क्यूसिक नहरी पानी का वितरण कितनी प्रभावी ढंग से करता है क्योंकि इसी पर जिले की सिंचाई और पेयजल व्यवस्था काफी हद तक निर्भर करेगी।
वर्सन :
नहरों में 1000 क्यूसिक पानी छोड़ा गया है। इस बार नहरी पानी से पूर्ति होने की उम्मीद है। किसानों को इससे लाभ मिलेगा और जलघर भी भरे जा सकेंगे। - सतेंद्र, कार्यकारी अभियंता, सिंचाई विभाग ।
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