-हथिनीकुंड बैराज के सभी गेट खुले, लगातार दिल्ली छोड़ा जा रहा पानी
अमर उजाला ब्यूरो/संवाद
करनाल/हिसार/रोहतक। पहाड़ों व मैदानी इलाकों में लगातार हो रही बारिश व पंजाब से लगातार पानी छोड़े जाने के कारण हरियाणा में नदियां व बरसाती नाले तबाही मचाने लगे हैं। शनिवार को कुरुक्षेत्र के शाहाबाद में मारकंडा व फरीदाबाद के मंझावली के पास यमुना ओवरफ्लो हो गई। इससे इन दोनों नदियों का पानी आसपास के 12 से अधिक गांवों में पहुंच गया। इसके अलावा यमुना का पानी पानीपत व करनाल में खतरे के निशान पर पहुंच गया है। वहीं, सिरसा में घग्गर भी खतरे के निशान पर बह रही है। हिसार में पिछले 24 घंटों में घग्घर ड्रेन चार स्थानों पर ओवरफ्लो होकर टूट चुकी है। इसके अलावा सोनीपत में यमुना नदी फिर उफान पर है। दो दिन में 6 फीट तक पानी बढ़ गया है। नदियों के ओवरफ्लो होने के कारण हरियाणा के ग्रामीण इलाकों में बाढ़ जैसे हालात बने हुए हैं। लोगों में फसलें डूबने का डर सता रहा है। सिंचाई विभाग की टीमें बाढ़ संभावित क्षेत्रों में लगातार गश्त कर रही है।
करनाल व सोनीपत में यमुना के किनारे बसे गांवों व बाढ़ संभावित क्षेत्रों में प्रशासन ने अलर्ट जारी किया है। कैथल के गुहला-चीका क्षेत्र में भी घग्गर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से छह फीट नीचे है। प्रशासन ने 20 डेरों में मुनादी करवा कर सतर्क रहने के लिए कहा गया है।
सिंचाई विभाग व स्थानीय प्रशासन के अनुसार नदियों में आए पानी के कारण प्रदेश में करीब 100 गांव प्रभावित हुए हैं। 73,800 एकड़ फसलों में पानी भरा हुआ है। अकेले सिरसा में 1200 एकड़ में फसल डूब चुकी है और 2630 एकड़ खराब हो गई। इसी तरह, फतेहाबाद में दस हजार एकड़, भिवानी में 2500 एकड़, चरखी दादरी में 4200 एकड़ फसल खराब हुई है। वहीं, कुरुक्षेत्र के कठवा, तंगौर, मलकपुर, गुमटी, तंगौर, कलसाना, मुगल माजरा, झरौली तक पहुंचने से करीब आठ हजार एकड़ में फसलें खराब हो गईं हैं।
दूसरी तरफ अंबाला में टांगरी नदी का जलस्तर कम हुआ है जिससे 40 बस्तियों में घरों को छोड़ चुके लोग लौट आए। यहां तबाही के निशान साफ नजर आ रहे हैं। जलभराव के कारण लोगों के घरों में आधा सामान खराब हो गया। व्यासपुर में सोम नदी का जलस्तर भी शनिवार को कम हो गया है लेकिन नदियों में आई गाद किसानों के खेतों में जमा हो गई है। इससे काफी नुकसान होने की संभावना बनी है। सोम नदी के पानी में शुक्रवार को 400 एकड़ फसल डूब गई थी। अंबाला छावनी में भी शुक्रवार को चंदपुरा के बांध के पास भूमि कटाव हुआ था, जिसे शनिवार को ठीक कर लिया गया। टांगरी के समीपवर्ती खेतों में 20 एकड़ तो मुलाना के गोला गांव में 50 एकड़ फसल जलमग्न हुई है। भिवानी के 25 गांवों व मुलाना के तीन गांवों में खेतों में जलभराव है।
हथिनीकुंड बैराज के सभी 18 गेट फिर खोले
यमुनानगर में शनिवार दोपहर तीन बजे हथिनीकुंड बैराज पर 57006 क्यूसेक जलस्तर दर्ज किया गया। इसके बाद भी बैराज के सभी 18 गेटों को खोला छोड़ दिया गया। बैराज पर आने वाले पानी को दिल्ली डायवर्ट किया जा रहा है जोकि 72 घंटे में वहां पहुंचेगा।
नदियों की ऐसी है स्थिति
-पानीपत में शुक्रवार रात को यमुना का जलस्तर खतरे के निशान 231.00 मीटर से 10 सेंटीमीटर अधिक था लेकिन शनिवार शाम को यह कम होकर यमुना खतरे के निशान पर बहा। तटबंध के आसपास करीब 10 हजार एकड़ क्षेत्र में पानी भरा हुआ है।
-करनाल में हथिनीकुंड बैराज से शनिवार को 55,180 क्यूसेक पानी नीचे के क्षेत्र में छोड़ने से फिर से यमुना का जलस्तर बढ़ गया।
-अंबाला में टांगरी नदी का जलस्तर 10 हजार क्यूसेक दर्ज किया गया जो खतरे के निशान से 10 फीट से छह फीट कम है।
-मुलाना के मारकंडा में 21500 क्यूसेक जलस्तर दर्ज किया गया। मुलाना में मारकंडा नदी में 6.2 फीट पर जलस्तर था जबकि इसका खतरे का निशान 10 फीट है।
-कुरुक्षेत्र में मारकंडा नदी में शनिवार को पानी 23 हजार क्यूसेक रहा, जबकि रात को यह 25 हजार क्यूसेक पहुंच गया था।
-सिरसा में घग्घर नदी का जलस्तर 28 हजार क्यूसेक रहा। रात तक जलस्तर और बढ़ने की संभावना है क्योंकि सरदूलगढ़ में 33,540 क्यूसेक पानी है। कई स्थानों पर घग्घर नदी खतरे के निशान से एक फीट नीचे बह रही है।
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रोहतक-जींद के खेतों में बरसात का पानी भरा
रोहतक जिले के महम, सांपला व कलानौर में 35 गांवों में करीब 30,000 एकड़ भूमि पर बारिश के बाद जलभराव है। कलानौर के कुछ परिवारों ने अपने स्तर पर दूसरी जगह शरण लेने की तैयारी की है। जींद के जुलाना के मालवी गांव में सबसे ज्यादा 2000 एकड़ फसलें पानी में डूबी हैं। निकासी के लिए 9 पंपसेट भी लगाए गए हैं। झमोला गांव में लगभग 500 एकड़ में जलभराव है। करेला गांव में लगभग 300 एकड़ में जलभराव है।
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हरियाणा ने बीबीएमबी को लिखा पत्र, पानी कम किया जाए
बाढ़ के खतरे को देखते हुए हरियाणा सरकार ने भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड और पंजाब सरकार को पत्र लिखा है। इसमें कहा कि बारिश के चलते पानी की मांग कम हुई है, इसलिए नहरों की ओर छोड़े जाने वाले 2,500 क्यूसेक पानी को कम किया जाए। -पेज दो पर पढ़ें
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हरियाणा में आपदा राहत बल की दो बटालियन बनेंगी
चंडीगढ़। हर साल बाढ़ के बढ़ते खतरे को देखते हुए सरकार ने हरियाणा आपदा राहत बल की दो बटालियन बनाने का निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री नायब सैनी ने कहा कि यह राज्य में किसी भी आपात स्थिति से निपटने और प्रभावित लोगों की मदद करेगी। इसमें प्रशिक्षित जवान होंगे।