- हाईकोर्ट ने दावा कर्ता की आदेश के खिलाफ दूसरी अपील खारिज की
- बिना किसी ठोस कानूनी प्रश्न के दूसरी अपील नहीं की जा सकती स्वीकार
चंडीगढ़। पंजाब व हरियाणा हाईकोर्ट ने एक अहम फैसले में साझा रास्ते से जुड़े विवाद पर दायर दूसरी अपील को खारिज करते हुए साफ कहा है कि जब यह माना जा चुका है कि गेट साझा रास्ते पर खुलता है तो इस रास्ते पर मालिकाना हक का दावा नहीं किया जा सकता है। जस्टिस दीपक गुप्ता ने यह फैसला एक दूसरी अपील को खारिज करते हुए सुनाया है।
विवाद नूंह जिले के गांव खेड़ला स्थित एक संकरी गली को लेकर था। वादी मोहर खान ने दावा किया था कि यह रास्ता वर्षों से दोनों पक्षों की ओर से उपयोग किया जा रहा साझा मार्ग है जिसका इस्तेमाल घर में आने-जाने, पानी निकासी और पाइपलाइन के लिए होता है। आरोप था कि प्रतिवादियों ने इस साझा रास्ते पर निर्माण सामग्री रखकर और पानी की टंकी बनाकर अवैध कब्जा करने का प्रयास किया। इसके खिलाफ स्थायी निषेधाज्ञा की मांग की गई थी। ट्रायल कोर्ट ने 10 जनवरी 2020 को और प्रथम अपीलीय अदालत ने 3 जुलाई 2024 को वादी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए प्रतिवादियों को रास्ते में दखल से रोका था। हाईकोर्ट ने इन फैसलों को सही ठहराते हुए कहा कि दोनों अदालतों के निष्कर्ष ठोस साक्ष्यों, गवाहों और दस्तावेजों पर आधारित हैं।
जस्टिस गुप्ता ने कहा कि जब स्वयं प्रतिवादी यह स्वीकार करता है कि वादी के मकान का गेट विवादित भूमि की ओर खुलता है तो वह उस भूमि पर अपने विशेष स्वामित्व का दावा कैसे कर सकता है? कोर्ट ने कहा कि प्रतिवादी पक्ष कोई भी ऐसा दस्तावेज पेश नहीं कर सका जिससे यह साबित हो कि विवादित भूमि उसकी निजी संपत्ति है। वादी की ओर से पेश किए गए साइट प्लान से स्पष्ट होता है कि यह रास्ता दोनों पक्षों की ओर से लंबे समय से इस्तेमाल किया जा रहा था। अदालत ने स्पष्ट किया कि साझा रास्तों पर निजी कब्जा किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है, खासकर जब वर्षों से उनका सार्वजनिक या साझा उपयोग होता रहा हो।