अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। सांसद दीपेंद्र हुड्डा ने कहा है कि कमजोर विदेश नीति और नीतिगत असंतुलन के कारण देश की अर्थव्यवस्था पर चौतरफा प्रहार हो रहा है। डॉलर के मुकाबले रुपया अब सबसे कमजोर स्थिति में है और बेरोजगारी अपने उच्चतम स्तर पर है। ऐसे में आगामी बजट आम आदमी को राहत देने वाला होना चाहिए। सांसद दीपेंद्र हुड्डा संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
हुड्डा ने गरीब और अमीर के बीच बढ़ती खाई, पिछले 10 साल में 16 लाख करोड़ रुपये के कर्ज माफ और निजी क्षेत्र की बढ़ती मोनोपॉली को चिंता का विषय बताया। उन्होंने हरियाणा के लिए महत्वपूर्ण परियोजनाओं महम अंतरराष्ट्रीय हवाईअड्डा, गोहाना रेल कोच फैक्ट्री, इंडियन नेशनल डिफेंस यूनिवर्सिटी और 11 अन्य संस्थानों के लिए पर्याप्त बजट देने की मांग की। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, खेल और रक्षा क्षेत्र में बजट बढ़ाने का भी आग्रह किया।
सांसद ने कहा कि स्वास्थ्य के लिए सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 2.5 फीसदी और शिक्षा के लिए 6 फीसदी, अनुसंधान और विकास (आरएंडडी) के लिए 2 फीसदी चाहिए था जबकि सरकार केवल क्रमश: 1.4 फीसदी, 4.5 फीसदी और 0.6 फीसदी दे रही है। डिफेंस में 1962 के बाद सबसे कम बजट 1.9 फीसदी दिया गया। अक्तूबर 2025 में व्यापार घाटा 41.7 बिलियन डॉलर, करंट अकाउंट डेफिसिट 1.3 फीसदी व जीडीपी व कर्ज का अनुपात 82 फीसदी तक पहुंच गया।