- फिंगरप्रिंट विज्ञान और नेफिस प्रणाली से अपराध नियंत्रण में मिली मदद
अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा पुलिस ने अपराध अन्वेक्षण के क्षेत्र में देशभर में नई मिसाल कायम की है। अत्याधुनिक फिंगरप्रिंट विज्ञान और नेफिस प्रणाली के जरिए राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो ने वर्ष 2024 में 57000 से अधिक फिंगरप्रिंट डाटा अपलोड किया। इसकी मदद से अब तक 111 आपराधिक मामले सुलझाए गए जिनमें 35 हत्या के गंभीर मामले शामिल हैं। इसी तकनीक की सहायता से वर्ष 2024 में 16 और वर्ष 2025 में अब तक 15 अज्ञात शवों की पहचान की जा चुकी है। वर्ष 2024 में लिए गए 2 392 चांस प्रिंट्स में से 916 का सफल मिलान हुआ जबकि 2025 में अब तक 2 865 चांस प्रिंट्स में से 115 का मिलान किया गया। पुलिस कर्मियों को प्रशिक्षित करने के लिए 176 कार्यशालाएं आयोजित की गईं।
पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर के मुताबिक राज्य में अपराधियों की पहचान को तकनीकी आधार पर मजबूत करने के लिए 31 स्थानों पर मेजरमेंट कलेक्शन यूनिट्स स्थापित की गई हैं। इन केंद्रों के माध्यम से 10,000 से अधिक अपराधियों का डाटा डिजिटलाइज कर राष्ट्रीय अपराध डाटाबेस में अपलोड किया जा चुका है। इस मामले में हरियाणा पूरे देश में पहले स्थान पर है। इससे अपराधियों की पहचान, पुराने मामलों की गुत्थियों के समाधान और अंतरराज्यीय अपराध नियंत्रण में काफी मदद मिली है।
नेफिस सॉफ्टवेयर अपराधियों के अंगुलछाप, हथेली छाप और अन्य बायोमीट्रिक विवरण को पूरे देश में जोड़ता है। इससे किसी भी अपराधी की पहचान कुछ ही सेकंड में की जा सकती है। हरियाणा पुलिस ने इस प्रणाली का उपयोग न केवल गिरफ्तार अपराधियों की पहचान बल्कि अज्ञात शवों और वारदात स्थलों से मिले चांस प्रिंट्स के मिलान के लिए भी किया है।
ये तीन बड़े केस सुलझे
सोहना हत्याकांड (गुरुग्राम) में पहाड़ियों से मिले शव की फिंगरप्रिंट पहचान से समीर राजभर के रूप में पहचान हुई और हत्यारे गिरफ्तार हुए। अंबाला चोरी मामले में घटनास्थल से मिले प्रिंट्स राजस्थान के अपराधी सोनू कांजर से मिले जिससे चोरी का नेटवर्क उजागर हुआ। गुरुग्राम डकैती केस के आरोपियों के फिंगरप्रिंट दक्षिण भारत की कई वारदातों से मिले जिससे एक बड़े अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश हुआ।