अमर उजाला ब्यूरो
चंडीगढ़। हरियाणा में धान की फसल का पंजीकरण कराने वाले किसानों के पराली प्रबंधन की नोडल अधिकारी खेतों पर पहुंचकर जांच शुरू करेंगे। सोमवार को कृषि एवं कल्याण विभाग की तरफ से नोडल अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया गया। जो भी नोडल अधिकारी तैनात किए गए हैं उन्हें एप के माध्यम से पंजीकरण कराने वाले किसानों का पूरा ब्योरा साैंपा गया है। अब नोडल अधिकारी जांच करेंगे कि किसान पराली प्रबंधन के लिए क्या कर रहे हैं।
कृषि एवं कल्याण विभाग की तकनीकी शाखा की तरफ से प्रदेशभर में तैनात किए गए खंडस्तरीय नोडल अधिकारियों व दूसरे सभी नोडल अधिकारियों को ऑनलाइन माध्यम से प्रशिक्षित किया। किसानों की तरफ से एक्स सीटू (खेत के बाहर), इन सीटू (खेत के अंदर) पराली और चारे के रूप में पराली के प्रबंधन के लिए पंजीकरण कराया है। अब नोडल अधिकारी एप पर उन किसानों का ब्योरा देखकर संबंधित किसान के पास पहुंचेंगे। इसमें उन्हें पूछा जाएगा कि पराली का प्रबंधन पंजीकरण के वादे के अनुसार किया है या नहीं। यदि खेत के अंदर पराली का प्रबंधन किया जा रहा है तो इसके लिए किन यंत्रों का उपयोग किसान कर रहे हैं या करेंगे। यदि खेतों के बाहर पराली प्रबंधन के लिए काम करेंगे तो किन उद्योगों, चारे के रूप में गोशालाओं आदि को कितनी पराली बेचेंगे। प्रदेश में 9131 नोडल अधिकारी बनाए हैं। रेड और येलो जोन में 50-50 किसानों पर 1-1 नोडल अधिकारी तैनात है जबकि ग्रीन जोन में शामिल गांवों 100 किसानों पर 1 नोडल अधिकारी तैनात है। नोडल अधिकारी खेतों में पहुंचकर वास्तविक स्थिति जानेंगे।